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श्रीनारद शिव महापुराण में उत्साह के साथ किया भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह,पाप और पुण्य हमें अलग-अलग मार्ग पर ले जाते है-भागवत भूषण पंडित प्रदीप मिश्रा

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16 जून को मंदिर परिसर में भव्य भजन संध्या का आयोजन
श्रीनारद शिव महापुराण में उत्साह के साथ किया भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह
पाप और पुण्य हमें अलग-अलग मार्ग पर ले जाते है-भागवत भूषण पंडित प्रदीप मिश्रा

सीहोर। हमारे पुण्य और पाप हमें अलग-अलग मार्ग पर ले जाते है। हम जैसा कर्म करेंगे, हमें वैसा ही फल की प्राप्ति होती है। मनुष्य को अपने कर्म करते हुए सावधान रहना चाहिए। शुभ कर्म मनुष्य को सुख- समृद्धि और शांति देते हैं। पाप कर्म का मार्ग बहुत ही कांटों पर आ होता है, दलदल भरे रास्ते की ओर जाना बहुत सरल है। परंतु इससे वापसी का कोई मार्ग नहीं होता। शुभ कर्म वाला रास्ता लंबा और परेशानियों वाला होता है। इस मार्ग में बहुत सी परीक्षाएं मनुष्य को देनी पड़ती है और वह जीवन भर के लिए सुखी हो जाता है। मनुष्य जो भी शुभ कर्म अपने इस जीवन में करता है। उनमें से कुछ को वह भोग लेता है, उसके शेष कर्म पूर्व जन्मों के बचे हुए कर्मों में जुड़ जाते हैं और यही कर्म मनुष्य का भाग्य बन जाते हैं। इन्हें कर्मों के अनुसार उसे अगला जन्म और सुख दुख आदि मिलते हैं। जिला मुख्यालय के समीपस्थ चितावलिया हेमा स्थित निर्माणाधीन मुरली मनोहर एवं कुबेरेश्वर महादेव मंदिर में जारी सात दिवसीय श्री नारद शिव महापुराण के तीसरे दिन मंगलवार को भागवत भूषण पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहे। उन्होंने नारद द्वारा माता पार्वती को भगवान शिव के तप के बारे में विस्तार से बताया। मंगलवार को भगवान शिव और माता पार्वती के विवाहोत्सव मनाया गया।
उन्होंने कहा कि शिव महापुराण की कथा पर जीवन में अमल करें। भगवान शिव तपस्या, त्याग, संयम एवं करुणा की मूर्ति हैं। शिव पूजन से प्राणी में उपरोक्त गुण पैदा होते हैं। शिव की उपासना करने वाले में अगर त्याग, दया व संयम नहीं है तो विचार कर लेना चाहिए कि साधना में त्रुटि अवश्य रह गई है। उन्होंने कहा कि अपनी संतान को संस्कारी बनाओं। एक मां-बाप के लिए उसके संतान से बड़ी दौलत और कुछ नहीं होता। लेकिन सभी अभिभावक अपने बच्चे के भविष्य और उसे मिलने वाले संस्कारों को लेकर अक्सर चिंता में डूबे रहते हैं। प्राचीन समय से चली आ रही कहावतों में से एक है पूत कपूत तो क्यो धन संचे, पूत सपूत तो क्यो धन संचे अर्थात अगर बेटा कुपुत्र है तो उसके लिये धन संचय क्यो किया जाय, वो तो उसे गलत कामो मे उडा देगा और अगर पूत सपूत है तब भी धन क्यो संचय किया जाय वो तो स्वयं अपनी काबलियत से आप से अधिक कमा सकेगा। जिंदगी का एक कड़वा सत्य है जब तक आप में कमाने की क्षमता है, तब तक आपके संबंधी आपसे जुड़े रहेंगे। बाद में जब आप जर्जर देह के साथ जीएंगे तो आपके घर में भी आपसे कोई बात नहीं करेगा। यह सत्य इतना सनातन है, जिसको आदमी समझ ले तो उसके जीवन में कभी दुख नहीं आएगा।
भव्य भजन संध्या का आयोजन
विठलेश सेवा समिति के मीडिया प्रभारी प्रियांशु दीक्षित ने बताया कि  चितावलिया हेमा स्थित निर्माणाधीन मुरली मनोहर एवं कुबेरेश्वर महादेव मंदिर में जारी सात दिवसीय श्री नारद शिव महापुराण का आयोजन दोपहर एक बजे से शाम चार बजे तक जारी रहती है। वहीं गुरुवार को भव्य भजन संध्या का आयोजन किया जाएगा। जिसमें प्रसिद्ध भजन गायक किशन भगत इंदौर वाले सहित अन्य भजन गायक अपनी प्रस्तुति देंगे।

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