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सीहोर : भारतीय खाद्य सेवा केन्‍द्रों का किया शुभारंभ स्व-सहायता समूह की महिलाएं करेंगी केन्द्रों का संचालन

अमित मंकोडी

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भारतीय खाद्य सेवा केन्‍द्रों का किया शुभारंभ

स्व-सहायता समूह की महिलाएं करेंगी केन्द्रों का संचालन

सीहोर 25 फरवरी 2021

भारतीय खाद्य सेवा केंद्र की अनूठी पहल जिसमें विकासखण्‍ड सीहोर के बिलकिसगंज, बरखेड़ी एवं सीहोर (लुनिया चौराहा) केंद्रों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में सस्ते एवं उचित दरों पर राशन तथा रोजमर्रा से जुड़े 50 से अधिक उत्पाद ग्राहकों को मुहैया हो सके इस हेतु बीच की कड़ियों को हटाते हुए प्राप्‍त होने वाला लाभ सीधे ग्राहकों को प्रदाय किये जाने के उददेश्‍य से यह कार्य किया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में इसके आउटलेट खोले जा रहे हैं जिसमें प्रत्येक परिवार को एक माह में लगने वाले राशन एवं अन्य सामग्रियों को ऑनलाइन ऐप के माध्यम से उनका राशनिंग कोटा मॉनिटरिंग किया जाएगा।

इस अनूठी पहल को मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन जिला सीहोर ने इनोवेशन के रूप में लिया है जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों में स्व सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं को उद्यमिता विकास और आजीविका संवर्धन से जोड़ते हुए रोजगार प्रदान करने के उददेश्‍य से यह आउटलेट खोले जा रहे हैं ताकि गरीब ग्रामीणों तक उचित एवं सस्ती दरों पर सामग्री उपलब्ध हो सके इन आउटलेट्स पर समूह द्वारा निर्मित सामग्री का भी विक्रय होगा जिससे विभिन्न कंपनियों द्वारा तैयार उत्पाद के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में तैयार किए जा रहे हैं उत्पाद के विक्रय हेतु उचित स्थान भी उपलब्ध होगें।

प्रदेश में नवाचार के रूप में पहली बार रोजमर्रा के सामान की आपूर्ति हेतु आजीविका मिशन सीहोर एवं भारतीय खाद्य सेवा केंद्र भोपाल के माध्यम से उचित एवं सस्ते दामों पर राशन की सामग्री ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है जिसमें मुख्य रुप से रोज उपयोग में आने वाली सामग्री की उत्पादक कंपनियां, एग्रीगेटर ,ट्रांसपोर्टर र्और ऑनलाइन टेक्नोलॉजी का उपयोग करते हुए अधिकतम लाभ उपभोक्ता को पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है जिसमें उपभोक्ता को 10 से लेकर 25% तक का लाभ इन केंद्रों के माध्यम से दिया जाएगा।

वर्तमान में इस नवाचार अंतर्गत सीहोर जिले में तीन आउटलेट शुरू कर आगामी एक माह में 100 नवीन आउटलेट खोले जाने की योजना है।

विशेषताएं :-

  • ग्रामीणों को सस्ता एवं उचित सामग्री उपलब्ध होना ।
  • सीधे उपभोक्ता को 10% से 25% का लाभ होना ।
  • ऑनलाइन तकनीक के माध्यम से स्टॉक और सेल को नियंत्रण करना ।
  • आउटलेट के संचालनकर्ता की उद्यमिता बढ़ाना।
  • समूह के परीसंघों के नियंत्रण में एवं मार्गदर्शन में कार्रवाई होना।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में समूह द्वारा उत्पादित सामग्री को इन आउटलेट पर विक्रय कराना।

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