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आष्टा : “प्रतीक्षा को मिला न्याय ” मजिस्ट्रियल जांच के बाद पुष्प कल्याण अस्पताल  प्रबंधन के साथ 2 डॉक्टर एवं एक नर्स के खिलाफ 304 का मामला दर्ज,जल्द हो सकती है गिरफ्तारी।

अमित मंकोडी

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सादर सौजन्य : वरिष्ठ पत्रकार एवम अधिवक्ता श्री सुधीर पाठक ।

प्रसूता प्रतीक्षा शर्मा एवं गर्भस्थ शिशु की मौत का मामला मजिस्ट्रियल जांच एवं मर्ग जांच के बाद अस्पताल  प्रबंधन एवं 2 डॉक्टर एवं एक नर्स के खिलाफ 304 का मामला दर्ज

 

 जच्चा बच्चा की मौतके मामले में पुलिस ने पुष्प कल्याणअ स्पताल की दो महिला चिकित्सक एवं एकन र्स के विरूद्ध प्रकरण दर्ज किया हैं। इधरजां चदल ने भी पुष्प कल्याण अस्पताल की अ नेक खामियों का अपनी रिपोर्ट में विस्तार से  उल्लेख करते हुए व्यक्किक्त या हैं की अस्पताल में पूर्णकालिक स्त्री रोग विशेषज्ञ ही नही हैं। जो अपने आप में आश्चर्यजनक हैं।
ज्ञात रहे कि पुष्प कल्याण अस्पताल में गुरूवार १० दिसंबर को सुबह ११ बजे प्रतिक्षा को परिवार के लोग लेकर गए, जहा महिला चिकित्सक ने कहा कि भर्ती करना पडेगा, आज डिलीवरी हो सकती हैं। परिजनों ने डॉ की बात मानकर प्रतिक्षा को भर्ती कर दिया, शाम ४ बजे तक ४ इंजेक्शन भी लगाए। इसके बाद महिला चिकित्सक और वहा मौजूद मेडिकल स्टाफ ने कहा कि कि प्रतिक्षा को  और कोई एक घंटे के बाद लगभग ५:३० बजे महिला चिकित्सक ने अस्पताल में मौजूद नेहा तिवारी और गिरिश शर्मा से कहा कि पेशेंट की स्थिति क्रीटिकल हैं, कुछ ही देर बाद दो नर्स आई और उन्होने कहा कि आप ओटी में चले
वहा पर मेडिकल स्टाफ के ६ लोग मौजूद थे।इस पर नेहा तिवारी और गिरिश शर्मा ने कहा कि पेशेंट से बात कराए तो डॉ ने कहा
कि हार्टबीट नही आ रही हैं, पल्स भी नही हैं, यह सुनकर दोनो के पैरों तले जमीन सरक गई और दोनो के दबाव देने पर प्रतिक्षा को वेंटिलेटर पर लिया गया, लेकिन तब तक प्रतिक्षा और गर्भस्थ शिशु की मौतहो चुकी थी।
इस मामले में पुष्प कल्याण अस्पताल प्रबंधन सहित महिला चिकित्सक सबीहाअंसारी, डॉ. हरमन, नर्स लारेन के द्वारा
बरती गई लापरवाही को लेकर मृतिका के परिजनों ने अनेक आरोप लगाए, वही मृतिका का शव परीक्षण भोपाल में कराने
के लिए कलेकटर को आवेदन पत्र सौंपा। इधर मृतिका की बहन नेहा तिवारी ने इस घटना को लेकर आरोपियों के विरूद्ध पुलिस सहित अन्य सक्षम अधिकारियों को आवेदन पत्र दिए घटना की गंभीरता और बड़ते जनाक्रोश के बीच कलेक्टर श्री गुप्ता ने मजिस्ट्रीयल जांच के आदेश ११ दिसंबर को दिए और इस दौरान जांचदल ने १० लोगो के बयान दर्ज किए और जांच रिपोर्ट
२९ दिसंबर को कलेक्टर को सौंपी। इसके बाद जिला पुलिस अधीक्षक श्री शिशेन्द्र सिंह चौहान के निर्देश पर आष्टा पुलिस
ने प्रकरण दर्ज किया हैं। पुलिस द्वारा देर रात दी गई जानकारी के अनुसार इस मामले में पुष्प कल्याण अस्पताल प्रबंधन के साथ चिकित्सक डॉ. हरमन जोसेफ, डॉ. सबीहा अंसारी एवं नर्स लौरेन के नाम काप्रथम सूचना रिपोर्ट में उल्लेख किया जाना बताया हैं।
प्रतिक्षा की मौत के मामले में पुष्प अस्पतालप्रबंधन एवं डाटर-नर्स के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किया।
प्ररतीक्षा शर्मा एवं उसके गर्भस्थ शिशु की मृत्यु के बाद उपजे जनआक्रोश के चलते मजिस्ट्रीयल जांच के आदेश कलेक्टर अजय गुप्ता द्वारा दिए गए थे। जिसके पालन में जांच समिति में डॉ. बीके चतुर्वेदी, डॉ.आनंद शर्मा एवं डिप्टी कले-टर रवि वर्मा द्वारा की गई जांच के बाद जो

 

जांचदल ने माना अस्पताल में नहीं हैं पूर्णकालिक स्त्री रोग एवं निश्चेतना विशेषज्ञ

निष्कर्ष समिति के सामने आया हैं, उसके अनुसार पुष्प कल्याण अस्पताल में प्रसुता की प्रसुति के पूर्व कोई नियोजित तैयारी नही थी, अप्रशिक्षित नर्स द्वारा एनेस्थिसिया का इंजेक्षन दिया गया।

अस्पताल में पूर्णकालिक निश्चेतना विशेषज्ञ नही हैं। डिलिवरी के प्रकरणों में भी बाहर से स्त्री रोग विशेषज्ञ को बुलाया जाता हैं। प्रस्तुता प्रतिक्षा शर्मा के प्रकरण में भी बाहर से स्त्री रोग विशेषज्ञ के रूप में डॉ क्रांति जैन को बुलाया गया। परंतु निश्चेतना विशेषज्ञ की अनुपस्थिति में अप्रशिक्षित नर्स लारेन द्वारा एनेस्थिसिया का इंजेक्षन दिया गया,जो अस्पताल प्रबंधंन के द्वारा गंभीर चिकित्सीय लापरवाही दर्शाता हैं। डॉ.हरमन का उल्लेख करते हुए जांच रिपोर्ट में वर्णित किया हैं कि अप्रशिक्षित नर्स लारेन द्वारा एनेस्थिसिया का इंजेक्षन देने से प्रसुता की स्थिति बहुत ज्यादा बिगडने के बाद आष्टा के सिविल अस्पताल से निश्चेतना विशेषज्ञ डॉ. सुर्दशन गे्रवाल को बुलाया जाना दर्शित करता हैं कि अस्पताल प्रबंधन ने प्रतिक्षा शर्मा को बचाने के कोई ठोस प्रयास नही किए। इस प्रकार प्रसूति के दौरान पूर्ण सावधानी उचित सतर्कता एवं मानक चिकित्सीय मापदंड अनुसार चिकित्सीय उपचार करने में पुष्प कल्याण अस्पताल प्रबंधन असफल रहा हैं। वही अस्पताल में पूर्णकालीक स्त्री रोग विशेषज्ञ एवं निश्चेतना विशेषज्ञ न होने के बावजूद अप्रशिक्षित स्टॉफ नर्स द्वारा सिजिरेयन डिलिवरी जैसी संवेदनशील सेवाए दी जा रही थी, जो प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से जनमानस के उपचार हेतु वैध नही हैं। इसी के साथ जांचदल ने पुष्प कल्याण अस्पताल के विरूद्ध वैधानिक कार्रवाई की अनुसंशा की हैं।

आष्टा टीआई श्री सिद्धार्थ प्रियदर्शन ने बताया कि मजिस्ट्रियल जांच रिपोर्ट एवं मर्ग जांच पर से आज आष्टा पुलिस ने डॉक्टर हरमेन, डॉ सबीहा अंसारी, सिस्टर लारेन्स एवं अस्पताल प्रबंधन को प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया है।

टीआई श्री प्रियदर्शन ने बताया प्रथम दृष्टया जो अभी दोषी पाये गये है उन पर धारा 304 का मामला दर्ज कर अनुसंधान जारी है,जांच में अगर ओर भी कोई दोषी पाया जाता है तो उन पर भी मामला दर्ज किया जायेगा।

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