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सीहोर हेल्थ विशेष : खून में ग्लूकोज और सोडियम की कमी से होता है चमकी बुखार

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खून में ग्लूकोज और सोडियम की कमी से होता है चमकी बुखार 

    सीहोर 26 जून,2019

      चमकी बुखार एईस (एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम) है। इसमें मरीज के शरीर में खून में ग्लूकोज एवं सोडियम की कमी हो जाती है। यह सिंड्रोम वायरस,वैक्टीरिया या फंगस के कारण हो सकता है। यह हाइपोग्लाइसीमिया कुपोषण और पौष्टिक आहार की कमी के कारण होता है।
      चमकी बुखार के लक्षण- लगातार तेज बुखार चढ़े रहना, बदन में लगातार ऐंठन होना, दांत पर दांत दबाए रहना, सुस्ती चढ़ना, कमजोरी की वजह से बेहोशी,चिकोटी काटने पर शरीर में कोई गतिविधि न होना, उल्टी आने की समस्या आदि चमकी बुखार के लक्षण हैं।

     उपचार– चमकी बुखार से पीडित इंसान के शरीर में पानी की कमी न होने दें। बच्चों को सिर्फ हेल्दी फूड ही दें। रात को खाना खाने के बाद हल्का फुल्का मीठा जरूर दें। मरीज थोड़ी-थोड़ी देर बाद तरल पदार्थ देते रहें ताकि उनके शरीर में पानी की कमी न हो। तेज बुखार होने पर पूरे शरीर को ताजे पानी से पोछें एवं पंखा से हवा करें ताकि बुखार कम हो सके। बच्चे के शरीर से कपड़े हटा लें एवं गर्दन सीधा रखें। पैरासिटामोल की गोली व अन्य सीरप डॉक्टर की सलाह के बाद ही दें। अगर मुंह से लार या झाग निकल रहा है तो उसे साफ कपड़े से पोछें, जिससे सांस लेने में कोई दिक्कत न हो। बच्चों को लगातार ओआरएस का घोल पिलाते रहें। तेज रोशनी से बचाने के लिए मरीज की आंखों को पट्टी से ढकें। बेहोशी व मिर्गी आने की अवस्था में मरीज को हवादार स्थान पर लिटाएं। उसे रात में भरपेट भोजन कराएं। चमकी आने की दशा में मरीज को बाएं या दाएं करवट लिटाकर चिकित्सालय लें जाएं।

      सावधानियां – बच्चों को जूठे व सड़े फल न खाने दें, भोजन करने के पूर्व हाथ अवश्य धोएं, खाने से पहले और बाद में साबुन से हाथ धुलवाएं, पीने का पानी स्वच्छ रखें, बच्चों के नाखून न बढ़ने दें, गंदगीभरे इलाकों से देर रखें, चमकी के लक्ष्य दिखने पर तेज धूप में जाने से बचें, दिन में दो बार स्नान कराएं, बच्चे को कंबल अथवा गर्म कपड़ों में न लपेटें, बच्चे की नाक न बंद करें। बच्चे की गर्दन झुकाकर न रखें। मरीज के बिस्तर पर न बैठें। 

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