Take a fresh look at your lifestyle.

सीहोर : स्कूली शिक्षा व्यवस्था में दिखने लगा है बदलाव

0 5

स्कूली शिक्षा व्यवस्था में दिखने लगा है बदलाव (विशेष लेख)

 सीहोर 16 दिसंबर,2019

स्कूली शिक्षा ही बच्चों के भविष्य का मार्ग प्रशस्त करती है। इसलिये जरूरी है कि शिक्षा गुणवत्तापूर्ण हो, स्कूलों में शिक्षा का उत्तम वातावरण हो और शिक्षक ज्ञान से समृद्ध हो ताकि बच्चे स्कूल आने और पढ़ाई करने के लिये लालायित रहें। राज्य सरकार ने प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण स्कूली शिक्षा व्यवस्था कायम करने के लिये पिछले एक साल में कई ऐतिहासिक निर्णय लेकर उन्हें जमीन पर उतारा है। अब बच्चे स्कूल पहुँचने लगे हैं, शिक्षक भी बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिये समर्पित हुए हैं। बदलाव नजर आने लगा है।

एक्सपोजर विजिट

स्कूली शिक्षा गुणवत्ता में सुधार के लिये “लर्न फॉर द बेस्ट” योजना लागू की गई है। योजना में विभागीय अधिकारियों, प्राचार्यों और शिक्षकों को स्थानीय निजी स्कूलों, दिल्ली के स्कूलों, नोएडा के महामाया स्कूल और दक्षिण कोरिया के कोरिया डेव्हलपमेंट इंस्टीट्यूट का भ्रमण कराया गया। इससे प्राचार्यों और शिक्षकों की सोच और पढ़ाने की शैली में बदलाव आया है।वे बच्चों की शिक्षा के प्रति जिम्मेदारी महसूस करने लगे हैं और नियमित स्कूल आने लगे हैं। 

बच्चों की कॉपियों की प्रतिदिन चैकिंग

स्कूलों में मूलभूत विषयों की कॉपियों की प्रतिदिन चैकिंग व्यवस्था लागू की गई है। जिला और  राज्य स्तर के अधिकारी स्कूलों का दौरा कर यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि शिक्षक अपने विद्यार्थियों की कॉपियाँ प्रतिदिन सही तरीके से जाँचें और गलतियों में सुधार करायें। प्रदेश के 2742 विद्यालयों में विशेष कॉपी चेकिंग अभियान चलाया गया है। कॉपी चेक नहीं करने तथा करेक्शन अंकित नहीं करने वाले शिक्षकों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की जा रही है। हाल ही में 139 शिक्षकों की वेतन वृद्धि रोकी गई, 425 शिक्षकों का वेतन काटा गया, 665 शिक्षकों को चेतावनी दी गई और 751 शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।

परीक्षा परिणामों का विश्लेषण

स्कूलों में परीक्षा परिणामों का विश्लेषण करने की व्यवस्था की गई है। तीस प्रतिशत से कम परीक्षा परिणाम वाले स्कूलों के शिक्षकों की दक्षता के आकलन के लिये 12 एवं 15 जून, 2019 को आयोजित परीक्षा में 6215 शिक्षकों ने परीक्षा दी। शिक्षकों को दक्षता सुधार का प्रशिक्षण भी दिया गया। इसके बाद दोबारा परीक्षा ली गई। इस परीक्षा में जिन शिक्षकों के परिणाम संतोषजनक नहीं थे, उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की गई। दो माह के प्रशिक्षण के बाद भी ओपन बुक एक्जाम में फेल होने वाले 16 शिक्षकों के विरुद्ध सख्त कार्यवाही करते हुए अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई। पालक-शिक्षक संवाद– स्कूलों में बच्चों के अभिभावकों के साथ नियमित पालक-शिक्षक बैठक की व्यवस्था लागू की गई है। अब सभी शासकीय स्कूलों में प्रत्येक तीन माह में एक साथ पालक-शिक्षक बैठक की जा रही हैं। इन बैठकों में छात्र प्रोफाइलिंग, दक्षता उन्नयन वर्क-बुक, प्रतिभा पर्व परिणाम,

ब्रिज कोर्स और अर्द्धवार्षिक परीक्षा, शाला में उपस्थिति आदि मुद्दों पर चर्चा की जा रही है। पहली बार हुई इन बैठकों में लगभग 40 लाख अभिभावकों ने भाग लिया। बाल दिवस पर शिक्षा मंत्री ने सभी अभिभावकों को पत्र भेजकर उनसे छात्र-छात्राओं की गुणवत्ता एवं दक्षता में सुधार में सहयोग करने की अपील की।

कक्षा पाँचवीं और आठवीं के लिये बोर्ड पैटर्न पर वार्षिक परीक्षा

वर्तमान अकादमिक सत्र 2019-20 से नि:शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 में किये गये संशोधन के अनुक्रम में पाँचवीं और आठवीं कक्षा के बच्चों का वार्षिक मूल्यांकन बोर्ड पैटर्न पर किये जाने का निर्णय लिया गया है। पाँचवीं और आठवीं कक्षा की वार्षिक परीक्षाओं में पास होने के लिये विद्यार्थियों को न्यूनतम 33 प्रतिशत अंक प्राप्त करने होंगे। ऐसा न करने पर उन्हें 2 माह बाद पुन: परीक्षा में बैठना होगा। यदि वे फिर भी पास नहीं हो पाते हैं, तो उन्हें पाँचवीं और आठवीं कक्षा से अगली कक्षा में उन्नत नहीं किया जायेगा।

Leave A Reply

Your email address will not be published.

error: Content is protected !!