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आष्टा : व्यक्ति को हमेशा अच्छी सोच रखना चाहिए, मधुर वाणी के कारण दिल में स्थान बना लेते हैं और कटु वाणी के कारण दिल से उतर जाते हैं -साध्वी अपूर्व मति माताजी

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व्यक्ति को हमेशा अच्छी सोच रखना चाहिए, मधुर वाणी के कारण दिल में स्थान बना लेते हैं और कटु वाणी के कारण दिल से उतर जाते हैं -साध्वी अपूर्व मति माताजी 

आष्टा। मनुष्य की वाणी अर्थात बोली में इतना प्रभाव रहता है कि वह व्यक्ति की पीड़ा को दूर कर देता है, वही कटु शब्द बोलने पर आंसू भी ला देता है ।मीठी वाणी संबंध बना देती है और कड़वी वाणी संबंधों को बिगाड़ देती है।व्यक्ति को हमेशा अच्छी सोच रखना चाहिए ,मधुर वाणी के कारण दिल में स्थान बना लेते हैं , वहीं कटु वाणी के कारण दिल से उतर भी जाते हैं। मीठी वाणी बोलने वाले के घर स्वर्ग के समान हो जाते हैं ।अपने से बड़ों का हमेशा आदर और सम्मान करना चाहिए ।आज लोग पाश्चात्य संस्कृति में जी रहे हैं ।इंग्लिश मीडियम का दौर चल रहा है।

      उक्त बातें श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर दिव्योदय तीर्थ क्षेत्र किला मंदिर पर संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर महाराज की परम प्रभाविका शिष्या आर्यिका रत्न अपूर्वमति माताजी ने अपनी सप्त दिवसीय व्याख्यानमाला के दूसरे दिन निर्मलता में सुमन खिले मृदुता से ही संबंध बने- विषय पर विशेष प्रवचन देते समय कही ।आपने आगे कहा कि आप की मधुर वाणी से रंजिश अर्थात विवाद व्यक्ति भूल जाता है। निर्मल वाणी जोड़ने का काम करती है वहीं कटु वाणी तोड़ने का काम करती है ।कोई कांटा गड़ जाए तो उसे काटा मत गडाना ,फूल दे देना ,उसका दिल बदल जाएगा ।ईट का जवाब पत्थर से देने वाले प्रतिशोध में जीते हैं ।ईट का जवाब फूल से देने वाले मैत्री भाव में जीते हैं ।माताजी ने आगे कहा कि बुराई का जवाब अच्छाई से देने में मैत्री भाव उत्पन्न हो जाते हैं ।तालाब में पानी सूखने पर जमीन पर दरारे आ जाती है ,उसी प्रकार दिल में दरार आने पर वह बमुश्किल मिट पाती है ।जबकि तालाब की दरार उसमें पानी समाहित होने पर मिट जाती है ।इंसान को इंसानियत की तराजू से तोलिए ,दो शब्द प्रेम से बोलिए ।ऊंची सोच वाले का काम भी अच्छा ही रहता है। कुछ दिल में उतर जाते हैं तो कुछ दिल से उतर जाते हैं । अपूर्वमति माताजी ने कहा वाणी में मिठास हो, मधुरता हो तो आपको अपने चेहरे पर मेकअप करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी ।जिस प्रकार कलाकार पत्थर में महिला व मूर्ति आदि बना देता है ।अपनों से बड़ों का आदर व सम्मान करना भी सिखाता है। आज देश में नीम के पेड़ कम होते जा रहे हैं, लेकिन कडवाहट लोगों में बढ़ती जा रही है ।दिल की मिठास कम होती जा रही है ,लेकिन शुगर की बीमारी लोगों में बढ़ती जा रही है। अपूर्वमति माताजी ने कहा कि जीवन में सत्संगति और उसके व्यापक प्रभाव देखने को मिलते हैं ।जीवन के प्रत्येक मोड़ पर हमें अच्छे और बुरे की पहचान करने की कला सीखनी होगी। जब कभी भी निर्णय और असमंजस की स्थिति बने तब निर्दोष मार्गदर्शन हमें अच्छे मित्रों से ही प्राप्त होता है । माताजी ने कथानक के माध्यम से बताया कि अच्छी मित्रों की पहचान विकट परिस्थितियों में होती है। उन्होंने कहा अच्छे मित्र आंखों की तरह साथ देते हैं ।जिस प्रकार एक आंख से आंसू आते हैं तो दूसरी आंख से आंसू आते हैं। इसी प्रकार सुख दुख में अच्छे मित्र ही काम आते हैं। अपूर्वमति माता जी ने कहा कि यह प्रवचन माला लोगों के घांव पर मलहम लगाने, आंखों के आंसू पोछने ,मन के गम को दूर करने ,जख्मों को भरने ,घाव को कम करने ,आदर व विनय सिखाने, माता पिता की सेवा करने ,मन को मान सरोवर बनाएगी। जिस प्रकार पानी की एक बूंद समुद्र में गिरती है तो वह खारी हो जाती है ,सीप पर गिरती है तो मोती बन जाती है ,नीम पर गिरती है तो कड़वी हो जाती है ,गन्ने पर गिरती है तो मीठी हो जाती है ।उसी प्रकार जैसी संगति वैसी गति होती है ।भगवान के मस्तिष्क पर यह पानी की बूंद पहुंचती है तो गंदोधक बन जाती है।अच्छी संगति से राम ,महावीर ,अर्जुन ,कृष्ण बन सकते हैं ।बुरी संगति से रावण ,दुर्योधन ,कंस बन जाएंगे ।आप ने कहा कि प्रेम ,विश्वास, श्रद्धा और आस्था के कारण हनुमान जी ने अपने शरीर पर सिंदूर लगा लिया था ।अच्छी पत्नी नसीब से मिलती है और संतान व दोस्त भी ।अच्छा नसीब है तो पड़ोसी भी अच्छा मिलता है। पत्नी का चयन माता-पिता करते हैं ।बच्चे का चयन भाग्य से होता है, वहीं मित्र का चयन आप स्वयं करते हैं ।साध्वी जी ने कहा मित्र के साथ बैठने से सुख दोगुना और दुख दूर हो जाए वही सच्चा मित्र। दुख के समय ढाल बनकर जो मित्र खड़ा हो जाए वही अच्छा मित्र। सौभाग्य से अच्छा मित्र मिलता है ।उपकारी का उपकार जिंदगी में कभी मत भूलना ।अच्छी बात पत्थर पर लिख दो ,बुरी बात को रेत पर लिख दो, जो हवा के झोंके से मिट जाए। अपूर्वमति माताजी ने कहा कि परिवार, राष्ट्र व समाज में संस्कार है तो सुखी रहेंगे। देश व समाज सुसंस्कृत हो जाए तो सब कुछ बदल जाएगा। उत्तम संस्कार महावीर ,राम , पार्श्वनाथ, कृष्ण व विद्यासागर बना देते हैं । गलत संस्कार के कारण दुर्योधन कंस जैसे बन जाते हैं।जीवन में संस्कार नहीं होने पर खराब हो जाता है। तीन श्रेणी के माता-पिता आपने बताएं। संबंधों का तार मोबाइल से नहीं दिल के तार से जोड़ता है ।पढ़ा-लिखा बेटा विदेश में नौकरी करने नहीं जाए वह कहता है कि मैं मां की वैशाखी बनूंगा, पिता के कंधे का सहारा बनूंगा ,यहीं रहकर काम करूंगा ।आपका बेटा आपकी अमानत है ।सच्चा बेटा श्रवण कुमार की तरह जो अपने माता पिता की सेवा करें। अच्छी शिक्षा से अब्दुल कलाम एवं ओबामा बन जाते हैं ,गलत शिक्षा से लादेन ,हिटलर बन जाते हैं ।अच्छी शिक्षा व संस्कार से राम ,महावीर का भक्त बन जाएंगे ।बच्चे को आपने गीली मिट्टी की तरह बताया। उसे जैसा ढांलोगे ढल जाएगा ।जीवन में संस्कार माता पिता ने कैसे दिए, वही काम आएगा। घर के संस्कार दूर ना होने देंगे। अपने सास-ससुर के दिल में बेटियां विशेष स्थान बनाए ।पाठशाला छोड़ने का मन भी बनाए। वह बच्चा बुढ़ापे में आपकी वैशाखी व लाठी बनेगा। संस्कार को जीवन में मजबूत बनाएं, ताकि कल अच्छा हो। सात दिवसीय व्याख्यानमाला का शुभारंभ संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर महाराज के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं चित्र अनावरण कर नगर पालिका अध्यक्ष कैलाश परमार ,वरिष्ठ अभिभाषक रूप सिंह ठाकुर, सुरेंद्र परमार श्री श्वेतांबर जैन दिलीप सुराणा, समाज के प्रमुखों आदि ने किया। वहीं माताजी के सांसारिक पिता गुलाबचंद जैन जबलपुर वालों ने शास्त्र भेंट किए ।इस अवसर पर श्री संघ अध्यक्ष पारसमल सिंघवी, महामंत्री त्रिलोक वोहरा ना केवल जैन समाज अपितु अन्य समाज के भी काफी संख्या में लोग आशीष वचन सुनने के लिए उपस्थित थे।

    दुख के मूल सुख की छाया विषय पर आज विशेष आशीर्वचन 

अपूर्वमति माताजी किला मंदिर पर प्रात 9 से 10 बजे तक दुख के मूल सुख की छाया विषय पर विशेष आशीष वचन देंगी।

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