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सीहोर : शैक्षिक भ्रमण से बच्चो के जीवन कौशल में होती हैं, वृद्धि

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शैक्षिक भ्रमण से बच्चो के जीवन कौशल में होती हैं, वृद्धि

सीहोर। स्थानीय शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय क्रमांक -1, सीहोर के छात्र छात्राओं ने समग्र शिक्षा अभियान कि वर्ष 2019- 20 की वार्षिक कार्य योजना के लिए शैक्षिक भ्रमण किया गया। जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों को शैक्षिक सांस्कृतिक वैज्ञानिक रूप से ज्ञान वर्धन और व्यक्तित्व विकास के अवसर उपलब्ध कराना है।
शैक्षिक भ्रमण प्रभारी और जीवन कौशल शिक्षा के रिसोर्स पर्शन ,डॉ. देवेंद्र साहू
ने बताया की उत्कृष्ट विद्यालय का दल शैक्षिक भ्रमण के लिए योद्धा स्थल,शौर्य स्मारक, और आंचलिक विज्ञान केंद भोपाल के लिए रवाना हुआ।
सर्वप्रथम छात्र-छात्राओं का दल योद्धा स्थल पहुंचे जहां सैनिक आचार संहिता का वीडियो दिखाया गया जिसमें सैनिक के सोचने के तरीके ,दृढ़ विश्वास, हर समय नया उत्साह तथा उमंग के साथ देश की सीमा एवं देश के आंतरिक भागों में मदद करने की भूमिका को दर्शाया गया। अर्थात भारतीय सैनिक देश की रक्षा के साथ-साथ आपदा प्रबंधन में भी साथ निभाते हैं।
युद्ध टैंक, मिसाइल, सेना का इतिहास, इत्यादि के साथ सैनिक अनुशासन भी सिखाया गया जिससे छात्र छात्राओं को सैनिक दृष्टि से सोचने तथा बच्चों में देश प्रेम की भावना का विकास हुआ।
इसके पश्चात शैक्षिक दल शौर्य स्मारक पहुंचा वहां सर्वप्रथम स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद बने राष्ट्रपति के चित्र देखें इसके बाद थल सेना, वायु सेना ,जल सेना के चित्र व नाम से परिचित हुए, भारत-पाकिस्तान युद्ध, भारत चीन युद्ध, कारगिल युद्ध की तस्वीरें बच्चों ने देखी जोकि सोशल स्टडी सब्जेक्ट के लिए छात्र हित में है।
भ्रमण के अंत में छात्र- छात्राओं ने आंचलिक विज्ञान केंद्र भोपाल पहुंचकर
जादू नहीं यह विज्ञान है, के अंतर्गत अनेक प्रायोगिक उपकरण से परिचित हुए, जिसमें घर्षण का बनना, वजन मापने के लिए बरनौली प्रमेय, पृथ्वी गुरुत्वआर्षण  से संबंधित वर्किंग मॉडल, बल, गैस के दाब से बाल का उडऩा, भूल भुलैया, डिजिटल स्क्रीन, समुद्री दुनिया पर 3ष्ठ फिल्म सी शार्क लाईफ का लुफ्त बच्चों ने लिया। एवं तारामंडल देखकर बच्चे उत्साहित हुए जहां उन्हें ब्रह्मांड की जानकारियां प्राप्त हुई। इस प्रकार छात्र-छात्राओं के वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ-साथ विद्यार्थियों ने पाठ्यक्रम से संबंधित अंश को ज्ञानार्जन किया तथा मनोरंजन भी किया।जीवन कौशल शिक्षा के जिला मास्टर ट्रेनर डॉ. देवेंद्र साहू  ने कहा कि छात्र छात्राओं की परीक्षा ठीक एक महीने बाद शुरू हो जावेगी। शैक्षिक भ्रमण से छात्र छात्राओं का मनोबल बड़ा है अब वे उत्साह और उमंग के साथ एक महीने बाद परीक्षा में बैठेंगे। साथ ही उनके जीवन कौशल में भी वृद्धि हुई है, उमंग मॉड्यूल के अनुसार किशोरों में 10 प्रकार के जीवन कौशल विकसित होना अनिवार्य है डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार 9 वर्ष से 18 वर्ष तक के बच्चों में 10 जीवन कौशल स्व जागरूकता, संवाद शैली, निर्णय लेना, समस्या समाधान, भावनाओं का प्रबंधन, अंतर व्यक्तित्व, तनाव का सामना, समालोचनात्मक चिंतन, रचनात्मक चिंतन, समनुभूती। उपरोक्त जीवन कौशल को प्रभावी बनाने के लिए स्कूल स्तर पर सप्ताह में 1 घंटे, प्रशिक्षित शिक्षकों द्वारा छात्र छात्राओं को उमंग मॉड्यूल के सत्र द्वारा सिखाया गया है।

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