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सीहोर : ठगी का शिकार हुए पंजीयक आफिस में कई लगा रहे चक्कर अचल संपत्ति का रजिस्टर्ड होना जरूरी-जिला पंजीयक कीर्ति असाटी

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ठगी का शिकार हुए पंजीयक आफिस में कई लगा रहे चक्कर
अचल संपत्ति का रजिस्टर्ड होना जरूरी-जिला पंजीयक कीर्ति असाटी
सीहोर। इन दिनों कई लोग अचल संपत्ति के लेन-देन के दौरान पंजीयन शुल्क की राशि आदि बचाने के लिए 1000 एवं 500 मूल्य के स्टाम्प पर कर लेते है बाद में उनको परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लोगों को अब परेशानियों से बचने के लिए जागरूक होना चाहिए और संपत्ति का सही तरीके से रजिस्टेशन कराना अनिवार्य है।
जिला पंजीयक अधिकारी कीर्ति असाटी ने बताया मध्यप्रदेश रजिस्ट्रीकरण (मध्यप्रदेश संशोधन) अधिनियम 2009 की धारा 17 के तहत कुछ दस्तावेज जिनका पंजीयन अनिवार्य है। जिले में यह देखा गया है कि सेवा प्रदाताओं द्वारा जारी किए जाने वाला ई-स्टाम्प पंजीयन अधिनियम, 1908 की धारा 17 के तहत अनिवार्य रूप से पंजीयन होने वाले दस्तावेजों के लिए जारी किया जा रहा है। जिससे शासन को पंजीयन शुल्क से प्राप्त होने वाले राजस्व की क्षति हो रही है।
मध्यप्रदेश रजिस्ट्रीकरण (मध्यप्रदेश संशोधन) अधिनियम 2009 की धारा 17 के तहत अनिवार्य रूप से पंजीयन होने वाले दस्तावेज जैसे अनुबंध पत्र, किरायानामा एवं ऐसे दस्तावेजा जो कि अचंल संपंत्ति से संबंधित होकर जिनका पंजीयन अनिवार्य है। उन दस्तावेजों की पंजीयन संबंधी कार्रवाई न किये जाने से पंजीयन शुल्क की राशि शासन को प्राप्त नहीं हो पाती है। सेवा प्रदाताओं द्वारा 1000 एवं 500 मूल्य का स्टाम्प आमजन का जारररी कर दिया जाता है, आमजन उक्त स्टाम्प का उपयोग अनुबंध पत्र, किरायानामा एवं अन्य ऐसे दस्तावेजों में कर लिया जाता है जो कि अचल संपत्ति से संबंधित है और उनका पंजीयन अनिवार्य है। आमजन द्वारा अचल संपत्ति का दस्तावेज निष्पादित कर उसके विक्रय मूल्य पर 0.08 प्रतिशत के मान से पंजीयन शुल्क देय होता है जोकि उनके द्वारा नहीं चुकाया जाता है। केवल 1000 एवं 500 मूल्य के स्टाम्प पेपर पर ही दस्तावेज का निष्पादित कर लिया जाता है। जिससे शासन को प्राप्त होने वाले पंजीयन शुल्क की राशि से वंचित होना पड़ता है।
उन्होंने बताया कि इस से राजस्व में वृद्धि तो होगी ही साथ ही पक्षकारों के साथ होने वाली ठगी संबंधी घटनाएं बंद होगी और अनुबंध पत्र, किरायानामा जैसे दस्तावेज पंजीयन होने से यह आवेदक के लिए सुरक्षा कवच साबित होगा, क्योंकि कई बार के्रता और विक्रेता के मध्य जमीन एवं मकान का 500-1000 रुपए के स्टाम्प पर लिखा-पढ़ी करके रख लिया जाता है किसी परिस्थिति में यदि कोई बाद में एग्रीमेंट रद्द कर देता है तो लोगों के बीच राशि लौटने में आनाकानी करने से विवाद होते है और अगर दस्तावेज रजिस्टर्ड करा लेता है तो उसे कोर्ट में भी कुछ ही दिन में राहत मिल जाती है और ठगी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी होती है।

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