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सीहोर : टिड्डी दल से बचाव व सतर्कता हेतु सुझाव, कृषि विभाग ने जारी की ऐडवाइसरी।

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टिड्डी दल से बचाव व सतर्कता हेतु सुझाव

प्रदेष में कई जिलों में टिड्डी दल के हमले की जानकारी निरन्तर प्राप्त हो रही है। सीहोर जिले के समीपस्थ जिलों – शाजापुर, देवास, राजगढ़ में टिड्डी दल प्रवेष की खबरें हैं। अपने जिले में भी टिड्डी दल के प्रवेष करने की सम्भावना है।
टिड्डी दल के हमले से सम्भावित नुकसान:- इस कीट का पतंगा लाखों – करोडों की संख्या में एक स्थान से दूसरें स्थान पर समूह में पहुॅचता है। जिस स्थान पर टिड्डी दल का ठहराव होता है, उस स्थान की सम्पूर्ण वनस्पति जैसे फसलें, फलदार वृक्ष एवं वन वृक्ष सब्जी फसलें आदि की पत्तियों एवं टहनियों को पूर्णतः चट कर जाता है। प्रभावित क्षेत्र की सम्पूर्ण फसलें नष्ट हो जाने की सम्भावना रहती है। यह कीट शांय 6ः00 बजे से रात 8ः00 बजे तक अधिक अक्रामक होता है। प्रातः 7ः00 बजे से दूसरे स्थान के लिए निकल जाता है।

बचाव के उपाय:
 किसान बन्धु ध्वनि विस्तारक यंत्रों जैसे ड्रम/ढ़ोल/टीन के डिब्बे आदि बजाकर टिड्डी दल को भगायें।
 रात्रि के समय मषाल जलावें एवं नीम की पत्तियों का धुॅआ करें।
 आवष्यक होने पर कीटनाषकों क्लोरोपाईरीफाॅस 20ः ई सी दवा 02 मिली./लीटर पानी में घोलकर अथवा डेल्टामेथ्रिन 2.8ः ई सी 01 मिली/लीटर पानी में घोल बनाकर फसलों पर छिड़काव करें।
 सब्जी एवं मूंग आदि फसलों में क्लोरोपाईरीफाॅस 0.5ः चूर्ण की 04 किग्रा./एकड अथवा क्यूनाॅलफाॅस 1.5 डी. पी. की 10 किग्रा./एकड मात्रा का भुरकाव करें।
 टिड्डी दल के अटैक के समय ट्रैक्टर चलित स्प्रे पम्प से पानी का छिड़काव कर बचाव किया जा सकता है।
 किसी भी स्थिति में टिड्डी दल को बैठने न दें।

नोट: टिड्डी दल का प्रकोप होने पर कृषि वैज्ञानिकों को अवगत करायें।
मोबाईल न. – 9926980176, श्री जैनेन्द्र कुमार कनौजिया, वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केन्द्र, मोबाईल न. -8840485018, श्री दीपक कुषवाहा, वैज्ञानिक मोबाईल न. -,8889469911, श्री धर्मेन्द्र पटेल, वैज्ञानिक एवं 7489763338 कार्यालय दूरभाष न. कृषि विज्ञान केन्द्र सेवनियाॅं, जिला – सीहोर।

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