Take a fresh look at your lifestyle.

आष्टा : मंगल कलश स्थापना की,साधना के पथ पर चलने का चातुर्मास -साध्वी अपूर्वमति माताजी

0 5

मंगल कलश स्थापना की,

साधना के पथ पर चलने का चातुर्मास -साध्वी अपूर्वमति माताजी

आष्टा। साधना के पथ पर चलने का चातुर्मास है।धर्म की प्रभावना न कर सको तो अप्रभावना भी मत करना ।प्रत्येक व्यक्ति के दिल में चातुर्मास करना चाहती हूं ।मैं आपके हृदय में परिवर्तन करना चाहती हूं ।ऐतिहासिक चातुर्मास भीड़ ,तामझाम आदि से नहीं भाव लिंग से होता है ।आपके मन में धर्म के प्रति भाव रहेगा तो ही यह चातुर्मास सफल होगा।पापियों को पावन बना दिया आचार्य विद्यासागर महाराज ने। कैदियों के प्रति करुणा आचार्यश्री के मन में उत्पन्न हुई और उन्होंने प्रदेश के अनेक जिलों में हाथ कर्धा का काम प्रारंभ करा दिया ।वही गौशालाएं भी प्रारंभ कराई ।प्रतिभा स्थली बच्चों के लिए इंदौर ,जबलपुर सहित अनेक स्थानों पर प्रारंभ करें ताकि बच्चियों को सुरक्षित रख कर हम उन्हें अच्छे संस्कार दे सके ।

    उक्त बातें शुक्रवार को श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर दिव्योदय तीर्थ क्षेत्र किला पर चातुर्मास हेतु कलश स्थापना समारोह के पावन अवसर पर संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर महाराज की परम प्रभावक एवं अज्ञानुवर्ती शिष्या आर्यिका अपूर्वमति माताजी ने आशीष वचन के दौरान कही। आपने आगे कहा कि जिन्होंने लाखों जीवो को गिरते हुए संभाला ,बिखरते हुए परिवार को जोड़ा, टूटे हुए दिलों को जोड़ा ऐसे विद्यासागर जी के चरणों में हम नमन करते हैं। आरम, परिग्रह से रहित समता का भाव रखते हैं। कुंदकुंद स्वामी ने शास्त्रों में उल्लेख भी किया है ।जो शास्त्र कहता है वह गुरु है ,जो गुरु कहते हैं वह शास्त्र। साध्वी जी ने कहा विद्यासागर जैसे गुरु की शरण हम सभी को मिली है ,उन्होंने अनेकों का जीवन सार्थक कर दिया है।

संयम की घंटी बुंदेलखंड से लेकर देश के कोने-कोने तक 

   साध्वी अपूर्वमति माताजी ने आगे कहा कि आचार्य श्री विद्यासागर महाराज ने संयम रूपी घंटी बुंदेलखंड से बजाई और बुंदेलखंड ही नहीं देश के अनेक प्रांतों में यह गूंज सुनाई दी और अनेक अत्यधिक शिक्षा प्राप्त करने वाले महिला एवं पुरुषों ने आचार्य श्री से दीक्षा ली। वह अपने इस मनुष्य जीवन को सार्थक करने के पथ पर अग्रसर हुए। दिव्या व सृष्टि दीदी भी जीवन को सफल बनाने के लिए दीक्षा के पथ पर अग्रसर हो चुकी है। गुरु दर्शन की महिमा पर आपने प्रकाश डाला। साध्वी जी ने कहा कि सागर नहीं गागर आपके आंगन में उड़ेल दूं। साधुओं को नहीं नेता – अभिनेताओं को व्यवस्था एवं सुरक्षा की आवश्यकता पड़ती है । आवश्यकता ,सुविधा शोक व इच्छाओं की पूर्ति के लिए पागल की तरह दौड़ रहे हैं ।नदियों का पानी समुद्र में मिल कर खारा हो जाता है ।अहंकार किस बात का ,मरने के बाद यह शरीर राख हो जाता है ।अपूर्वमति माताजी ने कहा संयम रुपी घड़ी व चैन पहनो ,बेचैन नहीं हो सकते। जीवन को सुखमय बनाने के लिए जिनवाणी का अध्ययन नित्य करें तथा अपने घरों में जिनवाणी को ससम्मान रखें । मद और पद सगे भाई के समान है, जो लोगों को अपने दायित्व के निर्वहन में अहंकार होने पर डुबो देते हैं ।पापोंदय से आंसू आते हैं ,पुण्योदय से नहीं ।जीवन में पुण्य का अहंकार मत करना ,मन में गुरु और प्रभु भक्ति आ जाए यही चाहत है।इस अवसर पर बाल ब्रह्मचारी प्रदीप भैय्या सुयश ने कहा कि ज्ञान व संस्कारों को और आगे बढ़ाने के लिए साध्वी जी का सानिध्य आचार्यश्री ने आप लोगों को दिया है। समय निकाल कर धर्म लाभ लेवे ।संतों के हाथों में जिनवाणी प्रदान करने का लाभ हर किसी को नहीं मिलता है। पिंडरई से पधारे चौधरी शंभू कुमार जैन, सौरभ कुमार जैन ने अपूर्वमति माताजी को जिनवाणी भेंट करने का लाभ प्राप्त किया। वहीं बाहर से पधारे अन्य श्रावक-श्राविकाओं ने साध्वी अनुत्तरमति माताजी एवं अगाधमति माताजी को भी जिनवाणी भेंट की।

नगर के पुण्योदय से नगर को निरन्तर आचार्य भगवंत संत शिरोमणी विद्यासागर जी महाराज का हमेशा आशिर्वाद मिलता रहा है और निरन्तर मिल रहा है। इसी कड़ी में पूज्य आर्यिका 105 अपूर्वमति माता जी ससंघ का चातुर्मास कलश स्थापना बड़े ही धूम धाम के साथ सम्पन्न हुआ। नगर को मिलने वाले चातुर्मास से पूरे समाज में उत्साह का माहौल बना हुवा है। धर्म की गंगा पूरे चातुर्मास के दौरान बहेगी ।कार्यक्रम की शुरुआत पाठशाला की टीम द्वारा मंगलाचरण कर शुभारंभ किया गया। आचार्यश्री के चित्र अनावरण व दीप प्रज्वलन बाहर से पाधरे समाज के अतिथि व माता जी के गृहस्थ  जीवन के परिजन द्वारा किया गया। कार्यक्रम का संचालन बाल ब्रह्मचारी प्रदीप भैय्या सुयश अशोकनगर ने किया। पूज्य माता जी ने इस वर्ष आचार्य श्री के 52 वे दीक्षा महोत्सव के 52 रजत कलश व 52 स्वर्ण कलश की स्थापना कराई। जो की समिति द्वारा निर्धारित राशी पर  लाभार्थी समाज बंधुओं के नाम किए गए।

इस अवसर पर नगर के मण्डल ,महिला मंडल ,सभी मंचों द्वारा आचार्य भगवंत की पूजन की व सभी मण्डल ने क्रम से आचार्य श्री का अर्घ समर्पण भक्ति भाव से नृत्य करते हुए किया।श्री दिगंबर जैन पंचायत समिति द्वारा बाहर से पधारे सभी अतिथियों का शाल -श्रीफल, मोतियों की माला से स्वागत -सत्कार व सम्मान संरक्षक सूरजमल जैन हर्राजखेड़ी, दिलीप सेठी, अध्यक्ष सुनील जैन आदिनाथ आदि ने किया। संचालन पुलक जन चेतना मंच के भूपेंद्र जैन ने किया। इस अवसर पर काफी संख्या में नगर सहित प्रदेश के अनेक नगरों एवं महानगरों से श्रावक श्राविका उपस्थित रहे।

Leave A Reply

Your email address will not be published.

error: Content is protected !!