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आष्टा : श्रीराम 14 साल बाद वनवास से लौटे थे और मैं 16 साल बाद इस नगरी में लौटा हूं,आष्टा में आस्था है – आचार्य पुलक सागर महाराज

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श्रीराम 14 साल बाद वनवास से लौटे थे और मैं 16 साल बाद इस नगरी में लौटा हूं,आष्टा में आस्था है – आचार्य पुलक सागर महाराज 

आष्टा ।इस आस्थावान नगरी आष्टा में न केवल जैन समाज अपितु अन्य समाज के लोगों में काफी आस्था है ।मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम 14 साल के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे और मैं 16 साल के पश्चात इस पावन धरा पर आया हूं। समाज के अलावा अन्य समाज के लोगों में भी जैन संतों के प्रति समर्पण भाव देखे गए।

                        उक्त बातें राष्ट्रीय संत ,शांतिदूत उपाधि से विभूषित आचार्य पुलक सागर महाराज ने 6 जनवरी सोमवार की दोपहर को नगर प्रवेश के पश्चात श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन दिव्योदय  अतिशय तीर्थ क्षेत्र किला मंदिर पर आशीष वचन के दौरान अपने संक्षिप्त एवं प्रभावी आशिष वचन के दौरान कही। दिगंबर जैन समाज केे प्रवक्ता नरेंद्र गंगवाल ने प्रवचन की जानकारी देते हुए बताया कि आचार्यश्री ने आगे कहा कि मैं इन 16 सालों के दौरान जहां भी रहा ,हर साल आष्टा के श्रावक -श्राविकाएं दर्शन एवं आशीर्वाद के लिए आते रहे हैं ।यहां की आस्था देखने लायक है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता है। श्री गंगवाल ने बताया कि आचार्य पुलक सागर महाराज ने आगे कहा कि नगर प्रवेश के दौरान मैंने देखा कि न केवल जैन समाज अपितु अजैन सभी उमड़ पड़े थे संत के स्वागत में ।

16 साल पहले दिया गया संदेश पुष्पित व अंकुरित हुआ

आचार्य पुलक सागर महाराज ने अपने आशीर्वचन के दौरान कहा कि इस नगर में 16 साल पहले में आया था और यहां के समाज जन व नगर वासियों को जो संदेश मैंने दिया था, वह संदेश पुष्पित व अंकुरित होकर अपनी छटा बिखेर रहा है ।मेरा इस नगर में 5 जनवरी को आने का था 2 जनवरी को पुष्पगिरी तीर्थ से  बिहार करना था ,लेकिन वहां बाबा ने कहा कि 2 को तो जाओगे 5 को 5 जाओ और इसके बाद साथ-साथ जाओ तो हम तीन आचार्य व दो मुनि गण इस पावन धरा के लिए पुष्पगिरी से 3 जनवरी को रवाना हुए और आज आप लोगों के साथ इस पावन मंदिर परिसर में पहुंचे हैं। 16 साल के बाद भी सबका साथ हैं और साथ रहेंगे।

रेस्ट नहीं एवरेस्ट

समाज के प्रवक्ता नरेंद्र गंगवाल ने बताया कि शांतिदूत आचार्य पुलक सागर महाराज ने अपने आशीष वचन के दौरान आगे कहा कि हम इतना बिहार विषम मौसम व परिस्थितियों के पश्चात भी करते हुए आष्टा पहुंचे हैं ।हमसे कहा कि रेस्ट कर लो, हमने कहा हम रेस्ट नहीं एवरेस्ट हैं।ज्ञान गंगा इस पावन स्थल पर 16 साल पहले की थी। आचार्य श्री ने अपनी बीती यादों को भी मंदिर में पहुंचकर ताजा किया और कहा कि बहुत शानदार मंदिर यहां का बन चुका है ।बड़े बाबा की कृपा सभी पर बनी रहे। 

नगर में पहली बार तीन आचार्य व दो मुनि

आचार्यश्री ने कहा कि इस आष्टा में पहले आचार्य, मुनि, साध्वी गण सहित कई संतों का आगमन हुआ होगा ,लेकिन आष्टा के इतिहास में पहली बार तीन आचार्य व दो मुनि एक साथ पधारे हैं। निश्चित आष्टा से बहुत गहरा नाता है। फूल खिलता है गुलशन की सुगंध आमंत्रण बन जाती है, तितली और भंवरे महक से आ जाते हैं। उसी प्रकार सभी ज्ञान गंगा का लाभ उठा एगे। निश्चित नगर प्रवेश के दौरान हमने यह भी देखा कि नगरवासी मुड़-मुड़ कर हम सभी संतो को देख रहे थे, समर्पण भाव यहां पर देखा गया। श्रावक से ज्यादा मुनियों की बात मानते हैं इसीलिए हमने हमारी भोपाल यात्रा को निरस्त कर दिया है। हम उज्जैन 26 जनवरी के पूर्व पहुंचेंगे। कुछ नया देने का प्रयास भी करुंगा।

कदम कदम पर हुआ पग प्रक्षालन

आचार्य पुलक सागर महाराज ,आचार्य प्रमुख सागर महाराज,आचार्य प्रणाम सागर महाराज ,मुनि प्रगल्भ सागर महाराज एवं मुनि प्रणित सागर महाराज का इंदौर नाका अलीपुर पर विधायक रघुनाथसिंह मालवीय ,नगर पालिका अध्यक्ष कैलाश परमार, दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष यतेंद्र जैन भुरु भाई, संरक्षक दिलीप सेठी, ललित नागौरी,कालू भट्ट, उमेश शर्मा सहित जैन अजैन लोगों ने गाजे बाजे के साथ आचार्य मुनि संघ की अगवानी कर विशाल जुलूस के रूप में अलीपुर मंदिर पहुंचे और वहां से नगर के प्रमुख मार्गो से होते हुए गंज मंदिर में दर्शन के पश्चात बड़ा बाजार और किला मंदिर पर पहुंचे। कदम कदम पर आचार्य गण का पग प्रक्षालन श्रद्धालुओं द्वारा भक्ति भाव से कर आरती भी की गई।

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