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आष्टा : वी आई टी कॉलेज कोठरी से चोरी हुए ट्रैक्टर और मोटरसाइकिल, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल,(कंजरों के आतंक की अनसुलझी कहानी)

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आष्टा : वी आई टी कॉलेज कोठरी से चोरी हुए ट्रैक्टर और मोटरसाइकिल, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल,(कंजरों के आतंक की अनसुलझी कहानी)

आष्टा के प्रसिद्ध वी आई टी कॉलेज कोठरी से ट्रैक्टर और मोटरसाइकिल के चोरी होने का मामला सामने आया है। यहां पर दो मोटरसाइकिल और ठेके पर चल रहा एक ट्रैक्टर चोरी हुआ है।

थाना प्रभारी सु श्री अरुणा सिंह ने जानकारी देते हुए बताया पर यदि सुरेश पिता रमेश चंद्र जाती खाती निवासी कोटरी ने। थाने पहुंचकर रिपोर्ट लिखवाई है कि मैं कोठरी में रहता हूं वी आई टी कॉलेज कोठरी में भाड़े पर ट्रैक्टर चलाता हूं दिनांक 13 फरवरी 2020 की रात 8:00 बजे वी आई टी कॉलेज कैंपस मैं मेरा मेसी ट्रैक्टर क्रमांक। एमपी 37 एबी 4609 हिंदी नंबर TSJ327A11844 चेचिस नंबरMEA99E83FH1149169 खड़ा कर दिया था। वहीं पर संतोष जैन और सुखराम मेवाड़ा की मोटरसाइकिल अभी खड़ी थी सुबह जब 9:00 बजे मैं काम पर गया तो देखा मेरा मेसी ट्रेक्टर एवं संतोष व सुखराम की मोटरसाइकिल नहीं मिली रोड पर खड़ी मोतीलाल की तूफान गाड़ी क्रमांक एमपी 37 बी बी 0662 भी नहीं मिली कोई अज्ञात चोर वाहनों को चोरी करके ले गए जिसकी कीमत। करीब ₹500000 होगी अब तक ट्रैक्टर गाड़ियां तलाश करते रहे एवं संतोष सुखराम, मोतीलाल गाड़ियों की तलाश के लिए निकले गाड़ियां नहीं मिलने पर फरियादी द्वारा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है पुलिस छानबीन में जुटी है।

ज्ञात हो क्या आष्टा तहसील में कंजर नामक चोर प्रजाति का आतंक है लगातार मोटरसाइकिल चोरियों मोटर चोरी और जानवरों की चोरी में इस प्रजाति का विशेष हाथ देखा गया है। पुलिस को खुली चुनौती देने वाला यह समाज लगातार क्षेत्र में वारदातों को अंजाम देता रहता है पुलिस के सारे प्रयास विफल होते हुए नजर आते हैं। पुलिस अधीक्षक शिशेन्द्र सिंह चौहान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक समीर यादव द्वारा टीम का गठन कर इन पर अंकुश लगाने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं अगर जावर थाने की माने तो विगत 2 माह में 60 से अधिक दोपहिया वाहनों की चोरी हो चुकी है और अब तक इन वाहनों के बारे में कोई जानकारी नहीं है। वहीं अगर आष्टा की बात करें तो नगर में। प्रतिदिन एक से दो मोटरसाइकिल का चोरी होना एक आम बात हो चुकी। नगर में कुछ दलालों द्वारा इस एक व्यापार का माध्यम बना लिया गया है। जब गाड़ी चोरी होती है तो एक या 2 दिन में दलाल वाहन मालिक को कॉल करके फिरौती की मांग करता है। दुपहिया वाहन है तो 12000 से 20000 के बीच वाहन छोड़ने के लिए फिरौती की मांग की जाती है। और कहां जाता है क्या कर पुलिस को इसकी सूचना दी गई या एफ आई आर करवाई गई तो कंजरो द्वारा गाड़ी को खोल कर उसके पार्ट्स को बेच दिया जाता है। ऐसे में गाड़ी मालिक एफ आई आर ना कराते हुए दलालों के माध्यम से अपनी गाड़ी कंजरो से छुड़वा कर वापस ले आता है इसी प्रथा ने इसे व्यापार का माध्यम बना दिया है। पुलिस पर लगातार प्रश्न उठते रहते हैं कि पुलिस कंजरों को पकड़ने में विफल रहती है। लेकिन कहीं ना कहीं आम जनता जब तक थाने में एफ आई आर दर्ज नहीं करवाएगी। पुलिस किस प्रकार से कार्रवाई करेगी?

13 फरवरी को बीआईटी कॉलेज से चोरी हुए वाहनों के बारे में किसी भी प्रकार की जानकारी कॉलेज प्रबंधन द्वारा पुलिस को नहीं दी गई। वही बीआईटी कॉलेज के प्रबंधक और सिक्योरिटी गार्ड पुलिस को भी कॉलेज परिसर में नहीं आने देते आष्टा अनुभाग में स्थित वीआईआईटी कॉलेज प्रबंधन के ऐसे अड़ियल रवैया से कई बार पुलिस और प्रबंधन के बीच कहासुनी भी हो चुकी है। इससे पूर्व भी परिसर में सिक्योरिटी गार्ड और छात्रों के बीच हुई मारपीट के समय भी पुलिस प्रबंधन को कॉलेज परिसर में घुसने के लिए काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। लेकिन चोरों ने बीआईटी कॉलेज की सिक्योरिटी को ध्वस्त करते हुए एक ट्रेक्टर और दो मोटरसाइकिल चोरी करने में सफलता हासिल की।

अब देखना यह है की खबर लिखे जाने तक तो वी आई टी कॉलेज प्रबंधन का कोई भी व्यक्ति आष्टा थाने तक नहीं पहुंचा है। अब कोई जाकर रिपोर्ट लिखवा ता है या नहीं और पुलिस इन चोरी गए वाहनों को बरामद कर पाती है या नहीं?

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