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आष्टा : पतझड़ में मधुमास जगाओं जन-जन का संत्राश मिटाओं, कण-कण की प्यास मिटाओं बरखा ने सिखलाया रे, पानी बाबा आया रे’’ -हेमंत श्रीमाल

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वो शख्स जोड़-तोड़ से ऊपर उठा जरूर, लेकिन हर एक शख्स की नजर से उतर गया
जिसने सभी को रोज दिखाये थे आईने, खुद आईने के सामने आते ही डर गया
अरसे बाद शहर में हुआ शास्त्रीय कवि सम्मेलन
देश के ख्यातनाम्् कवियों एवं कवियत्रियों ने किया रचना पाठ
आष्टा। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की 150वीं जन्म जयंती के उपलक्ष्य में मध्यप्रदेश शासन संस्कृति विभाग एवं नगरपालिका परिषद आष्टा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय स्तरीय कवि सम्मेलन स्थानीय बड़ा बाजार में आयोजित किया गया, जिसमें देश के सुप्रसिद्ध कवियों ने भाग लेकर अपनी श्रेष्ठतम्् कविताओं एवं रचनाओं का पाठ कर देर रात्रि तक श्रोताओं को गुदगुदाया व मंत्रमुग्ध किया।
शुक्रवार की रात नगर के हृदय स्थल पीपल चौराहा पर आयोजित काव्य महोत्सव में पूज्य बापू के आदर्श शरद ऋतु की उजास, नवरात्रि की आराधना सामाजिक विसंगतियों पर तंज, हास-परिहास से युक्त शानदार रचनाओं का पाठ सुनने को मिला। मां शारदे की वंदना और दीप प्रज्जवलन से शुरू हुए कवि सम्मेलन में नपाध्यक्ष़्ा कैलाश परमार ने सभी कविगण का स्वागत करते हुए मंचीय कवि सम्मेलनों में आ रही गिरावट की तरफ भी इशारा कर दिया जिसे ख्यातनाम्् कवियों ने चुनौती के रूप में लेते हुए काव्य के ऐसे रस और रंग बिखेरे कि सुनने वाले वाह-वाह कर उठे। कवि सम्मेलन का रंग ऐसा भी जमा कि श्रोता शुरू से अंत तक हिले भी नही। सूत्रधार अशोक भाटी ने स्थानीय कवि गीतेश्वर बाबू देव्वाल घायल की प्रतिनिधि रचना जिंदगी की राह में कई पथिक मिले मुझे, तुम मिले तो जिंदगी की साधना बदल गई… से सम्मेलन की शुरूआत कराई। झीलों की नगरी उदयपुर से पधारी कवियत्री दीपिका माही ने मेवाड़ की मीरा के उद्दात प्रेम को अपनी विशिष्ट भाव भंगिमा के साथ प्रस्तुत किया, उनके गीत बस्ती-बस्ती बदरा बरसे, तरस गए हम सावन में, ऐसे रूठे सजना हमसे मौसम गया मनावन में… सहित गीतों में अभिव्यक्त राधा, रूकमणी और मीरा के प्रेम के शास्वत स्वरूप को जमकर सराहा गया।
हास्य व्यंग के ख्यातनाम कवि ग्वालियर से पधारे तेजनारायण बेचैन ने हनी ट्रेप जैसे सामायिक विषय पर तंज कसते हुए कहा कि शहदखोर भालूओं का पता नही मधुमक्खियां रिमांड पर है। उन्होंने साम्प्रदायिकता पर चोट करते हुए कहा कि देश में कुछ बिगड़ा है तो यह है कि मैं खुद बिगड़ा हूं, सड़क नही चरित्र साफ करों। अपनी रचनाओं में बेचैन ने कवियों को सरकारों का चिरंतन विपक्ष बताया, उनकी रचना ‘‘कमाल है हमारा बगीचा जिंदा है, हमारे ही पसीने पर और यह महकता हुआ गुलाब आपके सीने पर’’ को खूब सराहा गया।
उज्जैन के वरिष्ठ कवि हेमंत श्रीमाल ने अपनी प्रतिनिधि रचना चंबल की बेटी में जब यह पंक्तियां पढ़ी ‘‘चीखे भी चीख-चीखकर खामोश हो गई आखिर में यह हुआ कि मैं बेहोश हो गई’’ सन्नाटा सा खीच गया। धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को दर्शाती हेमंत श्रीमाल की अत्यंत रसीली कविता पानी बाबा आया रे में ‘‘पतझड़ में मधुमास जगाओं जन-जन का संत्राश मिटाओं, कण-कण की प्यास मिटाओं बरखा ने सिखलाया रे, पानी बाबा आया रे’’ कवि सम्मेलन को ऊंचाईयों पर ले गई।
कवि सम्मेलन के सूत्रधार अशोक भाटी ने हास्य-व्यंग के रंग बिखेरते हुए अपनी रचना में कहा कि बापू ने अहिंसा के मंत्रों से सत्य को मजबूत किया। पुलिस के चालान, कानून में बदलाव पर पुलिस के पक्ष में ही चुटिली रचना के माध्यम से अशोक भाटी ने अनेक विसंगतियों को उजागर करते हुए जहां श्रोताओं को जमकर गुदगुदाया, वहीं पुलिस के प्रति सम्मान के भाव प्रकट करके वाह-वाही भी बटौरी।
दिल्ली की विदुषी कवियत्री सुश्री सीतासागर ने अपने शास्त्रीय अंदाज, भाव प्रणव प्रस्तुति और श्रृंगार तथा दर्शन के संयुक्त भावों को प्रकट करती कविताओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी सूफियाना रचनाओं से रसिक श्रोता भाव-विभौर हो गए। उनके प्रसिद्ध गीत रंग मंच पर पात्र सभी अभिनय करते रहते थे, तरह-तरह के नाटक मन में भर-भरते रहते थे, पास में तुम आए दृश्य सब समझाएं, कथा को सार बना डाला, एक अधूरे को पूरा किरदार बना डाला… की अद्भुत प्रस्तुति श्रोताओं की सराहना को पराकाष्ठा पर ले गई।
वहीं फरीदाबाद के ख्यातनाम गीतकार दिनेश रघुवंशी के गीत और गजल ने अलग ही समां बांध दिया। मां की ममता, पूज्य महात्मा गांधी और सामाजिक सौद्देश्यता को मजबूत करती उनकी रचनाओं में करूणा, श्रृंगार और वीर रस के मिश्रित भावों से श्रोतागण रूबरू हुए। ‘‘जिसने सभी को रोज दिखाए थे आयने, खुद आयने के सामने आते ही डर गया’’…, खिलौना दे न पाई तो खुद खिलौना बन गई अम्मा…, न यह ऊंचाई सच्ची है न यह आधार सच्चा है, न कोई चीज दूसरी न कोई संसार सच्चा है, अगर सच्चा है जग में तो मां का प्यार सच्चा है… जैसी दिनेश रघुवंशी की रचना ने कवि सम्मेलन को वर्षो बरस के लिए अविस्मरणीय बना दिया।
अत्याधिक अनुशासन, सादगी और गरिमामयी महौल में संपन्न हुए कवि सम्मेलन में शुद्ध काव्य रसपान का लाभ श्रोताओं को मिला। कवि सम्मेलन के उपरांत इस आयोजन में महती भूमिका निभाने वाले समाजसेवी प्रदीप प्रगति ने सभी श्रोतागण एवं कवियों के प्रति आभार व्यक्त किया। आमंत्रित कविगण को नपाध्यक्ष कैलाश परमार, उपाध्यक्ष खालिद पठान, पार्षदगण शाहरूख कुरैशी, आतू मौलाना, नरेन्द्र कुशवाह, सुभाष नामदेव, पार्षद प्रतिनिधि घनश्याम जांगड़ा, सईद टेलर, जाहिद गुड्डू, अनिल धनगर, शैलेष राठौर, सुभाष सांवरिया द्वारा शाल-श्रीफल व प्रतिक चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का प्रारंभिक संचालन स्थानीय कवि अतुल सुराना द्वारा किया गया।

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