सीहोर

आष्टा : दोस्ती देखना हो तो कृष्णसुदामा की देखो- आचार्य श्री पुलक सागर जी महाराज

आष्टा।। आष्टा के बड़ा बाजार में अपार जन समुदाय को सम्बोधित कर रहे आचार्य श्री। टेलेंट स्कूल के छात्र छात्राओ ने सुनी पुलक वाणी- धर्म सभा में संगस्थ आचार्य प्रणाम सागर जी महाराज ने कहा कि मोत जब समाधि मरण में बदल जाती है तो सुमरन में बदल जाया करती है
सबसे बड़े गुरु होते है,जब बच्चे राम के मंदिर में जाते है तो कहते है हम हिन्दू है पर जब स्कूल जाते है तो कहते है हम माँ सरस्वती के पुत्र है,
संत तो शंख नाद करने आये है,हिन्दू कहता हमारे राम सबसे बड़े मुस्लिम कहता हमारे पैगम्बर सबसे बड़े ,भगवान, जहाँ भूमि गगन वायु अग्नि पानी समावेश हो जाये वही भगवान बन जाया करते है, आचार्य बनाने के बाद सबसे पहले आचार्य पुष्पदन्त सागर जी ने हमे सबसे पहले आष्टा भेजा है ऐसा नाता है आश्था नगरी से अस्टापद का रूप है आष्टा, आज की धर्म सभा मे टेलेंट स्कूल प्राचार्य सुदीप जयसवाल के समस्त बच्चो ने धर्म सभा का श्रवण किया,
आचार्य पुलक सागर जी महाराज ने अपने उदभोदन मे कहा कि
कड़ाके की ठंड मध्य्प्रदेश में उसके बाद भी आप इतनी संख्या में प्रवचन सुनने आये है ये आपकी गुरु के प्रति भक्ति है आप दिलो से जुड़े है पूज्य श्री ने आज दोस्ती मित्रता,की मिसाल देते हुए बताया कि
जिंदगी का नाम —-दोस्ती दोस्ती का नाम जिंदगी,
राम का हनुमान से मित्रता, कृष्ण का सुदामा से मित्रता बिना दोस्त के जिंदगी नही चलती, दोस्ती का रिश्ता बना कर रखो हर रिश्ता बिकाऊ हो सकता है दोस्ती का रिश्ता नही बिक सकता, कुछ रिश्ते रब बनाता है कुछ हम बनाते है कुछ रिश्ते दोस्ती से बन जाया करते है
तीन चीजे किस्मत से मिला करते है
अच्छी पत्नी किस्मत से मिला करती है,अच्छी सन्तान किस्मत से मिला करते है,अच्छे दोस्त किस्मत से मिला करते है,पिता को अपनी संतान की तारीफ जरूर करना चाहिए,
पत्नी को लाने में परिवार का हाथ होता है सन्तान को लाने में प्रकति क हाथ हुआ करता है दोस्त बनाने हमारा व्यवहार का हाथ होता है हम जैसा व्यवहार रखेंगे वैसा ही जीवन में परिवर्तन दिखाई देगा दोस्त बड़े सोच समझ कर बनाना,
सबसे ज्यादा मिठास घोलो दोस्त अच्छे बनाओ ,दोस्त की संगत हमे जीवन मे दर्पण का काम करती है
गलत पत्नी एक पीढ़ी खराब करती है गलत दोस्त सात पीढ़ी खराब कर देती है बच्चो का चरित्र दोस्त जैसा होगा वैसा होता है,गलत संगति से कुछ गलत नही होता हम गलत होंगे तो ही गलत होता है,बच्चा मोबाइल से नही बिगड़ा वो गलत था तभी तो बिगड़ा बुराई हमारे मन मे है, दोस्त बहुत अच्छे बनाना,अक्सर दोस्त बे वफा मिलते है वफादार कम ही मिलते है,वफादार दोस्त को मत तलाशिये खुद वफादार बन जाइये,चहरे की धूल साफ कीजिये, दोस्त स्ट्रीट लाइट की तरह होते है, जिंदगी में कोई अच्छा दोस्त न मिले तो किला मन्दिर जाना नदियां वाले बाबा को दोस्त बना लेना, दर्पण तुम केसी दोस्ती रखते हो खुद टूट जाए करते हो पर मुझे नही टूटने देते हो,कच्चे बर्तन पर अकड़ो मत, दोस्तो से ज्यादा दुश्मन याद आया करते है,दोस्त याद नही आया करते, दुश्मनी का सफर ज्यादा लम्बा नही हुआ करता है,दुश्मनी जब हम करते है तो सारी अच्छाई बुरी लगती है ,दोस्त बनाते है तो सारी बुराई अच्छी लगती है,पीठ पीछे दोस्त की बुराई मत करना, रिश्तेदारी ओर दोस्ती, कोंन ज्यादा मुख्य होती है,दोस्ती मुख्य होती है, रिश्तेदारी में बहुत ओपचारिकटाये होती है,देश मे एकता और अखण्डता लाना है तो दोस्ती अच्छी होना चाहिए,रिश्तेदार हमेसा शिकायत ही किया करते है दोस्त कभी शिकायत नही करते, बाप अपने बच्चों से दोस्त जैसा व्यवहार करें,समाज के बीच दोस्त बन कर रहो कभी विकृति नही आएगी,दोस्ती गहरी हो न हो भरोसा गहरा होना चाहिये, ढाल ओर तलवार की दोस्ती लोग देखते है,दोनों हमेशा साथ ही रहते है, दोस्ती देखना हो तो कृष्ण सुदामा की देखो, अपने दिल के किसी कोने में कब्रिस्तान जरूर बनाना,अपनी गलतियों को दिल क कब्रिस्तान कोने में दफना देना,
माफ करना तो गलती करते क्यो हो,सबसे बड़ा रिश्ता इस दुनिया मे दोस्त का होता है,हम कितने खुदगर्ज लोग है,जिसका जिसके प्रति जो मन मे मेल हो आज धो लेना मन को बड़ा बनाओ मित्र बनाये नही जाते मित्र अर्जित किये ज।ते है आचरण से व्यवहार से मित्र दिल से जोड़े जाते है,हर रिश्ते में दोस्ती की मिठास डालो दोस्ती में खुददरिया नही देखी जाती,

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