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आष्टा : तबादलों का दौर जारी, एसडीओपी के बाद आष्टा थाना प्रभारी का भी स्थानांतरण, अब सिद्धार्थ प्रियदर्शन होंगे थाना प्रभारी आष्टा, देल्ही कॉलेज के संस्थापक श्री परमार ने किया स्वागत और पूर्व थाना प्रभारी को दी विदाई

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आष्टा तबादलों का दौर जारी, एसडीओपी के बाद आष्टा थाना प्रभारी का भी स्थानांतरण, अब सिद्धार्थ प्रदर्शन होंगे नवागत थाना प्रभारी आष्टा।

आष्टा थाना प्रभारी अरुणा सिंह का कार्यकाल बहुत कम समय के लिए रहा अरुणा सिंह आष्टा थाने की प्रथम महिला नगर निरीक्षक बनी थी जिन्होंने अपने पूरे कार्यकाल में कई उपलब्धियां हासिल की किसी भी अधिकारी का बेदाग स्थानांतरण होना भी एक बड़ी उपलब्धि है और आष्टा के पूर्व थाना प्रभारी अरुणा सिंह भी उन्हीं में से एक है जिन्होंने अपने कार्यकाल में चोरियों पर अंकुश लगाया कई मोटरसाइकिल चोरों के दलालों को भी पकड़ा संपूर्ण जिले में सबसे ज्यादा क्राइम रिपोर्ट को भी निकाल कर उसका हल किया साथ ही दिनों संयुक्त टीम में शामिल होकर कंजरो के ढेरों से बड़ी संख्या में मोटरसाइकिल भी बरामद की गई बताने को बहुत कुछ है लेकिन उनका कार्यकाल संक्षिप्त में बेहतर रहा इस अवसर पर स्थानीय देल्ही कॉलेज के संस्थापक घनश्याम परमार द्वारा प्रतीक चिन्ह देकर उन्हें विदाई दी गई साथ ही जो न्यूज़ दर्पण के संस्थापक अमित मनकोड़ी द्वारा भी प्रतीक चिन्ह देकर उन्हें विदाई दी गई

जिले का आष्टा थाना एक ऐसा थाना है जहां विभिन्न प्रकार की चुनौतियों से थाना प्रभारियों को गुजर ना होता है जैसे अपहरण चोरी कंजरो का आतंक जैसी कई ऐसी बड़ी चुनौतियां हैं जिसका उन्हें सामना करना होता है।

आष्टा में नवागत थाना प्रभारी के रूप में श्री सिद्धार्थ प्रियदर्शन ने कल शाम आष्टा थाने का चार्ज लिया इस दौरान  दिल्ली कॉलेज  के संस्थापक  घनश्याम परमार द्वारा  श्री सिद्धार्थ प्रियदर्शन  का शॉल और श्रीफल देकर  स्वागत किया गया सिद्धार्थ प्रियदर्शन 2000 बैच का ऑफिसर है साथ ही परोसा बुधनी मंडी थाना कोतवाली थाना बैतूल हंडिया और मुरैना जैसी चुनौतीपूर्ण थानों में पदस्थ रहे हैं और एक व्यवहार कुशल थाना प्रभारी के रूप में देखे जाते हैं

 

अपने अधीनस्थ कर्मचारियों के प्रति अच्छा व्यवहार तो रखते हैं लेकिन ड्यूटी के समय को लेकर काफी सख्त है किसी भी प्रकार की कार्य में लापरवाही वह बर्दाश्त नहीं करते है वही अपराधियों के साथ सख्ती पूर्ण रवैया उनकी पहचान है किसी प्रकार के अपराधी को वह नहीं बख्शते ।

अब देखना यह है कि 400 से अधिक क्राइम रिपोर्ट वाले आष्टा थाने में वह कैसे लोगों को अपनी कार्यशैली से प्रभावित करते हैं

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