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आष्टा : जहां नारी का सम्मान नही होता,वहाँ देवता भी नही विराजते है – पं पाठक

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जहॉ नारी का सम्मान नही होता,वह देवता भी नही विराजते
है—पं पाठक
गीतॉजलि गार्डन मे चल रही श्रीमद देवी भागवत महापुराण
ज्ञानगंगा के द्वितीय दिन मॉ गंगा की उत्पत्ति का सुंदर चित्रण
आष्टा :-नगर के मध्य गीतांजलि गार्डन कन्नौद रोड पर चल रही
संगीतमय श्रीमद देवी भागवत महापुराण ज्ञानगंगा के द्वितीय दिवस पर प्रातः
स्थापित देवताओ का पूजन अर्चन मुख्य यजमान परिक्षित पं सुरेष दुबे ने
सपत्नि अन्य भक्तो के साथ उपस्थित होकर विप्र मंडली द्धारा वेदमंत्रो
के साथ संपन्न कराया। तत्पष्चात दोपहर 2 बजे श्रीमद देवी भागवत
महापुराण ज्ञानगंगा का रसापान नगरपुरोहित कथाव्यास डॉ दीपेष पाठक
के द्धारा कराया गया प्रारंभ मे श्रीमद देवी भागवत महापुराण का पूजन एंव
कथाव्यास का स्वागत सीहोर विधायक धर्मपत्नि श्रीमति अरुणा रॉय,श्रीमति
नमिता रॉय एंव समाजसेवी श्री अवधनारायण जी सोनी प्रभूप्रेमी संध
महिला मंडल की अध्यक्ष सरोज पालीवाल द्धारा आर्षीवाद ग्रहण किया गया
कथाव्यास डॉ दीपेष पाठक ने कथा का रसापान कराते हुए भक्तो को
नारी के सुंदर चरित्र एंव मॉ गंगा की उत्पत्ति का सुंदर मार्मिक वर्णन
किया गया पं पाठक ने बताया कि श्रीमद देवि भागवत महापुराण नारी शक्ति
के सम्मान का महापुराण है इस महापुराण मे कहा गया है कि नारी का
सम्मान ही देवताओ की पूजन है जिस धर मे नारी का सम्मान नही होता है
वह पर देवता भी विराजमान नही होते है । पं पाठक ने मॉ गंगा की
उत्पत्ति का सुंदर वृतांत बताया कि पूर्वजन्म मे राजा शांतनु महाभिष
थे । ब्रह्माजी की सभा मे वह उपस्थित थे उस वक्त गंगा भी वह पर
उपस्थित थी राजा महाभिष मॉ गंगा को एकटक देखने लगे मॉ
गंगा भी मोहित होकर उन्हे देखने लगी ब्रह्याजी ने यह सब देख लिया
और उन्हे मनुष्य योनि मे दुख झेलने का श्राप दे दिया। राजा महाभिष
ने कुरु राजा शांतनू के रुप मे जन्म लिया और उससे पहले गंगा ने ऋषि
जह्नू की पुत्री के रुप मे जन्म पाया । एक दिन पुत्र की कामना से शांतनु के
पीता महाराज प्रतीप गंगा के किनारे तपस्या कर रहे थे उनके तप,रुप और
सौन्दर्य पर मोहित होकर गंगा की दाहिनी जंधा पर आकर बैठ गई और कहने लगी राजन मे आपसे विवाह करना चाहती हूॅ । मे जह्नू ऋषि की पुत्री
गंगा हूॅ। इस पर राजा प्रतीप ने कहॉ गंगे तुम मेरी दाहिनी जंधा पर
बैठी हो जबकि पत्नि को तो वांमगी होना चाहिए दाहिनी जंधा तो
पुत्र का प्रतीक है । अतः मे तुम्हे अपनी पुत्रवधू के रुप मे स्वीकार कर
सकता हूॅ । यहॉ सुनकर गंगा चली गई और महाराज प्रतीप के पुत्र होने
पर उसका नाम शांतनू रखा गया । और गंगा का विवाह हुआ और वह
गंगा से आठ पुत्र हुए जिसमे से सात पुत्रो को गंगा मे बहा दिया गया एंव
आठवे पुत्र का पालन पोषण किया गया जो आगे चलकर भीष्म पितामाह के रुप
मे विख्यात हुए ऐसे सुंदर प्रंसग को सुन श्रोता आत्मविभोर होकर सुंदर
नृत्य करने को मजबूर हो गये इसके बाद कथा विराम दिया गया पष्चात श्रीमद
देवी भागवत महापुराण की सुंदर आरती एंव गुरुवर महामंडलेष्वर
आचार्य अवधेषानंद महाराज जी की आरती की गई तत्पष्चात प्रसाद का वितरण
संजय कुमार जी सोनी हातोद वालो के द्धारा किया गया इस अवसर पर श्रीमति अरुणा
जी रॉय,नमिता जी रॉय,समाजसेवी अवधनारायण जी सोनी, कमलकिषोर जी
नागौरी,मधुसुदन जी परमार,राजू जी जायसवाल,नितिन भटट,मनोज जी
सोनी,अनिल जी भाटी,महेन्द्र जी शर्मा,श्याम जी शर्मा,कन्हैयालाल जी
शर्मा,भवानीष्ांकर जी शर्मा,प्रेमनारायण जी शर्मा,गोविंद जी
शर्मा,सुरेष जी पालीवाल,विनोद सोनी,गणेष उपाध्याय,प्रभूप्रेमि महिला
मंडल की अध्यक्ष सरोज पालीवाल,राखी परमार,मंजू पालीवाल,रीना
शर्मा,सुषीला पालीवाल,मालती भाटी,शारदा सोनी,संगीता सोनी,कु
नेहा सोनी,अमिता पटेल,रानी पटेल,ज्योति भाटी,बबीता सोनी,सुनीता
नागर,हेमलता सोनी,अर्चना सोनी,सरोज खंडेलवाल,विद्या
खंडेलवाल,अनिता शर्मा,सुनिता शर्मा,मधु मुदडा,गायत्री सोनी,पूजा
सोनी,रमा श्रीवादी,मीनू पाठक,नीलम सोनी,रेखा सोनी,जयश्री सोनी,किरण
ताम्रकार,दुर्गा तिवारी,अर्चना सोनी,श्रद्धा जायसवाल सहित नगर के महिला
मंडल सहित अन्य भक्तगण उपस्थित थे कार्यक्रम का सफल संचालन दिव्य
ब्राहम्ण संगठन की राष्ट्रीय संरक्षक श्रीमति विजयलक्ष्मी उपाध्याय द्धारा किया गया

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