आष्टासीहोर

आष्टा : गृहस्थो के पास वसीयतें होती है सन्तो के पास नसीहते- आचार्य पुलक सागर महाराज

’ आष्टा– ज्ञान गंगा महोत्सव के अंतिम दिवस पर अपार जन समुदाय को सम्बोधित करते हुए भारत गौरव कवि ह््रदय,पूज्य आचार्य श्री पुलक सागर जी महाराज ने कहा कि माँ बाप जब दुनिया से जाते है तो वसीयत में कुछ न कुछ देकर जाते है गृहस्थों के पास वसीयत होती है सन्तो के पास नसीहते होती है वो ही देकर जाते है , जिंदगी को प्रेम से जियो मेरी वसीयतों में नसियत होती है मेरे महावीर भी कुछ देकर गए, कपूत बेटा वो होता है जो बिगाड़ कर देता है सपूत बेटा वो होता है जो सम्हाल कर रखे, आज हिंदुस्तान का हर मुनि 90 प्रतिशत महावीर के मार्ग पर चलता है, श्रावक से पूछता हूं तुम कितना श्रावकाचार पालते हो,प्याज कटने से एक कि आखो में आशु आता है ब्याज कटने से’ कितनो की आशु आते है, जिसकी जो हैशियत हुआ करती है वो ही दे पाता है, मरने से पहले अपने घर की वसीयत जरूर लिख देना,जो माँ बाप मरते दम तक बटवारा नही करते,उनके बेटे उनका मरने का इंतजार करते है,जाने के बाद भाई भाई में लड़ाई होगी,मेरे पास कुछ नही केवल विचारो की विरासत है इसे सम्हाल कर रखना, में तुम्हारे काम का नही पर जो मेरी बातें है वे ही तुम्हारे बड़े काम की है इन्हें सहज कर रखना, ऐसी विरासत बनाओ प्रमुख सागर जी महाराज ने अपने आशीर्वचन में कहा कि,पिक्चर देखने जाते हो तो सेकेंड क्लास के लोग आगे बैठते है फर्स्ट क्लास के लोग पीछे बैठते है उसी प्रकार यहाँ आये हो तो जब तक जीवन मे सयंम का मन नही होगा,आज अपने बुरे विचारों को छोड़ कर चले जाना, मन की पवित्रता का स्नान करना ज्ञान गंगा में आये हो मन मे जो भी विकृति हो छोड़ कर चले जाना आष्टा की आश्था की ज्ञान गंगा सार्थक हो जाएगी ,कभी भी जीवन मे क्रोध हिन्दू मुस्लिम को देख कर नही मन की विकृति से क्रोध आता है अहंकार क्रोध आदमी के धोका खाना आसान है लोभ आदमी के सन्तोष गुण को समाप्त कर देता है,जो भी विकृति सही रूप में आज ही छोड़ कर चले जाना, आज से 22 वर्ष पूर्व में यहाँ आया था आदमी इतना बेईमान हो गया है मन्दिर में बोलता कुछ और है बहार आकर करता कुछ और हे वैराग्य ओर म्रत्यु उम्र का तकाजा नही करता है, छोटे छोटे नियम लो जीवन मे बिना नियम के गाड़ी नही चलती, जीवन मे नियम जरूर लो,कल कल करते काल आ जायेगा कल नही आएगा,
पूज्य आचार्य श्री पुलक सागर जी महाराज ने
जिन शरणम तीर्थ में 1- 1 जिन प्रतिमा विराजमान करने का सौभाग्य अशोक कुमार महेश कुमार कासलीवाल परिवार, परिवार,मोतीलाल नरेंद्र कुमार गंगवाल परिवार,जितेंद्र कुमार रूपचन्द जैन परिवार,श्रीमती पुष्पा टोंग्या,रोहित मोहित टोंग्या परिवार, ने प्राप्त कर पूज्य श्री से मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया,
ताज मोहम्मद ताज एडवोकेटट ने विशेष रूप से प्रवचन श्रंखला में प्रतिदिन पहुँच कर अपनी बन्दगी पेश की एवम आशीर्वाद प्राप्त किया जो आदमी को आदमी से अलग करे वह धर्म नही,जो लोगो के दिलो को जोड़े उन्ही सन्तो को बुलाओ सम्मान करो, दुनिया को तोड़ो मत जोड़ो,
समाज एक रहेगी तो ही उसकी कीमत रहेगी समाज अगर टूट गई तो उसकी कोई कीमत नही रहेगी,जो घर राष्ट्र जो समाज टूटता है उसकी कोई कीमत नही हुआ करती है, शर्णार्थिउयो को अगर देश मे शरण मिल जाये तो उससे अच्छी बात ही क्या मेरा भारत अगर आगे बढ़ रहा है तो चार अच्छे लोगो से चल रहा है भरस्टाचारी नेता से नही,कितनी पुरानी पुरानी समस्या हल हो गई कश्मीर भारत की तकदीर है उसे हम किसी को कैसे दे दे,जब सीता जमीन में समा रही थी तो एक ही वरदान मांगा प्रभु से हर जन्म में राम जैसे पति मिले आज से ही अपना व्यवहार बदल लो ,कैसा चरित्र है आपका कैसा व्यवहार है आपका दुनिया मे इज्जत कमान आसान है घर मे अपनी इज्जत बनाना आसान नही,घर मे अपनी इज्जत बनाओ,दीवारों पर मेरी तस्वीर मत लगाओ मुझे दिल की दीवार पर लगाओ ,जो लिखकर जाते है वो याद रखे जाते है ,

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