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आष्टा : एक ध्रुव तारा अमावस्या की रात को रोशनी बिखेर देता है -आर्यिका अपूर्व मति माताजी

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एक ध्रुव तारा अमावस्या की रात को रोशनी बिखेर देता है ,आचार्य विद्यासागर महाराज संसार की नैय्या से पार लगा देते हैं -आर्यिका अपूर्व मति माताजी

श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का समापन हवन पूजन के साथ हुआ

आष्टा। अमावस्या की रात को अंधेरा हो जाता है, लेकिन एक ध्रुवतारा ऐसा आता है जो इस अमावस्या की अंधेरी रात को रोशनी में बदल देता है। इसी प्रकार इस कलयुग में संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर महाराज ऐसे ध्रुव तारे के रूप में इस पावन भूमि पर आए हैं ,जो हम साधु-साध्वियों के अलावा श्रावक -श्राविकाओं की जिंदगी को भी तार रहे हैं अर्थात मोक्ष के मार्ग पर जाने के लिए प्रेरणा दे रहे हैं। ऐसे गुरु भगवंत की आराधना एवं दर्शन का लाभ लेते रहना चाहिए ।गुरु आज्ञा से जुड़ने पर कल्याण होता है ।सत्ता ,संपत्ति व शरीर कम होता जाता है। श्रद्धा देव ,शास्त्र, गुरु पर अटूट बनी रहे ।इस गति को छोड़कर जाएंगे तो यह शरीर नहीं रहेगा ,ना ही परिवार ,पैसा व मकान ।सभी यही धरे रह जाएंगे। इस मानव पर्याय को सार्थक करने के लिए देव, शास्त्र, गुरु द्वारा बताए गए मार्ग पर चलें ।

    उक्त बातें श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर दिव्योदय अतिशय तीर्थ क्षेत्र किला पर श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के समापन अवसर पर अपने आशीर्वचन के दौरान आर्यिका रत्न  अपूर्वमति माताजी ने कही।

     दिगंबर जैन समाज के प्रवक्ता नरेंद्र गंगवाल ने उक्त जानकारी देते हुए बताया कि इस पावन अवसर पर किला मंदिर में अष्टाह्निका पर्व के तहत धार्मिक अनुष्ठान हुआ। आर्यिका अपूर्वमति माताजी, अनुत्तर मति माताजी एवं अगाधमति माताजी के सान्निध्य में सिद्ध चक्र मंडल विधान में 1024 अर्घ्य चढ़े। मंडल अभिषेक, शांतिधारा हुई। अपूर्वमति माताजी ने बीजाक्षर मंत्र हजारों बार बोला। इसे मंडलों के व अन्य इंद्र-इंद्राणियों ने दोहराया। सिद्धक्षेत्र में मंगलवार को पर्व का समापन हुआ। अभिषेक, विधान के साथ हवन में श्रद्धालुओं द्वारा आहुति डालकर विश्व शांति की कामना की गई। समाज के प्रवक्ता नरेंद्र गंगवाल ने बताया बीजाक्षर मंत्र के साथ समाज के लोगों ने भक्ति भाव के साथ हवन में आहुतियां दी। 


 धनात्मक ऊर्जा लेकर जाएं

अपूर्वमति माताजी ने बताया ये बीजाक्षर मंत्रों से अतिशयकारी परिणाम मिलते हैं। आप जो भी यहां आए हो, और जो पुण्य अर्जन कर रहे हो, यहां से आप धनात्मक ऊर्जा लेकर जाएंगे। जिन्होंने भी मंडल पर यहां बैठ कर पूजा कर रहे हैं, अपने पापों का क्षय कर रहे हैं। इससे आपके जीवन में बदलाव आएगा। मंगलवार को सुबह नित्य नियम पूजन, अभिषेक, शांतिधारा, विश्व शांति हवन यज्ञ के साथ सिद्ध चक्र मंडल विधान का समापन हुआ। जहां धर्म से जुड़े रहने की प्रेरणा दी। वहीं संयम धारण कर तप, त्याग के मार्ग पर अग्रसर होने की कामना की। आपने कहा कि गुरुवर ,जिनवाणी से जुड़े रहें तो यह मनुष्य गति में आना सार्थक होगा। इस अवसर पर इंदौर से पधारे ब्रह्मचारी पारस भैय्या ने श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के समापन अवसर पर मंत्रोचार के साथ हवन- पूजन संपन्न कराई ।इस हवन -पूजन के पश्चात भगवान की प्रतिमाओं को श्रद्धालुओं ने अपने सिर पर रख कर मंदिर की परिक्रमा लगवा कर वापस मंदिर में भगवान की प्रतिमाओं को सम्मान विराजित किया।

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