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आष्टा :‘‘इस दीवाली दीप जलाना किसी शहीद के आंगन में’’ साहित्य शिल्पी की सरस काव्य निशा सम्पन्न

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‘‘इस दीवाली दीप जलाना किसी शहीद के आंगन में’’
साहित्य शिल्पी की सरस काव्य निशा सम्पन्न
– नगर के प्रबुद्ध कवियो एवं साहित्यकारो की संस्था साहित्य शिल्पी की मासिक सरस काव्य निशा कवि अतुल जैन सुराणा के सौजन्य से एम.टेक. कम्प्यूटर के सभागृह में सम्पन्न हुई जिसमें क्षेत्र के सभी कवियो नें एक से बढ़कर एक कविताओ का पाठ करके समां बांध दिया।
नगर गंगा-जमुनी तहजीब एवं सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश करते हुये सर्वप्रथम मुस्लिम रचनाकार अजमतउल्लाह द्वारा सरस्वती वंदना का पाठ किया गया एवं इस्लामिक वंदना हम्द का वाचन शायर सैयद जावेद अली द्वारा करते हुये काव्य निशा का शुभारंभ किया गया।
इसके पश्चात् जुगल किशोर पंवार नें अपनी पिताजी वरिष्ठ साहित्यकार स्व. हीरालाल जी पंवार की रचना का पाठ करते हुये सुनाया ‘‘हिन्दी गति है हिन्दी जीवन हिन्दी प्रणाधार’’ वही चंचु ताम्रकार नें अमन अक्षर का गीत सस्वर पढ़ा साथ ही वरिष्ठ नोटरी एडवोकेट राधाकृष्ण धारवां नें भी अपने चिन्तन को कुछ दोहो के माध्यम से प्रस्तुत किया। गीतकार आदित्य गुप्ता नें शराब एवं नशे के दुष्परिणामो को अपनी कविता का रूप देकर प्रस्तुत किया वहीं कजलास से पधारे मूलचंद धारवां नें अपनी हास्य पैरोडियो से सबको गुदगुदाया। डॉ. प्रशांत जामलिया ने इस बार अतिवृष्टि से जो विपदायें किसान झेल रहें है उसे अपनी रचना में ढालते हुये कहा कि ‘‘सहमा-सहमा बैठा घर में आज हर एक किसान है।’’ अलीपुर के युवा कवि अरविन्द नामदेव नें अपनी ओजस्वी रचनाओं से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया वहीं उसी क्षेत्र के शैलेष शर्मा साहिल नें अपनी कविता में बचपन को याद करते हुये कहा कि ‘‘तपती जवानी आ गई बचपन को मेरे जला गई।’’ अपने क्रम में डॉ. कैलाश शर्मा नें वर्तमान विपरीत परिस्थितियो को अपनी रचना में संजोया और सुनाया ‘‘मजबूर हो गई हर बात इस समय’’ इसी विषय को आगे बढ़ाते हुये अजमतउल्लाह नें भी अपनी रचना में भी इसी विषय को समाहित किया और सदन की वाहवाही लूटी। आयोजक कवि अतुल जैन सुराणा नें अपनी कविता के माध्यम से आगामी दीवाली को सार्थक बनाने का संदेश देते हुये कहा कि ’’इस दीवाली दीप जलाना किसी शहीद के आंगन में’’ और इसके बाद संगीतज्ञ श्रीराम श्रीवादी में अपनी श्रृंगार की गजलो से समां बांध दिया उनकी गजल का मिसरा ‘‘अगर रूख से जरा चिलमन हटा लोगे तो क्या होगा’’ काफी सराहा गया इसी खुशनुमा माहौल में अगला स्वर अमर सिंह घनघोर नें लगाया और कहा कि ‘‘हमारे गीत जबसे वो गुनगुनाने लगे, तस्व्वुरो में हमें रात भर जगाने लगे।’’ इसके बाद श्रृंगार के माहौल को हास्य रस से सारोबार करते हुये आयोजन का संचालन कर रहे गोविन्द जी नें जब अपनी चुटीली हास्य क्षणिकाआें को अपने विशेष अंदाज में प्रस्तुत किया तो हर और ठहाके गूंज उठे अंत में काव्य निशा का गरिमामय समापन शायद सैयद जावेद अली की गजलो से हुआ उनकी गजल ‘‘रौनक होने वाली है हफ्ते बाद दीवाली है।’’ को भरपूर दाद मिली। आयोजन में अश्विन सुराणा, विकास धारवां, विश्वास जैन का विशेष सहयोग रहा। सफल संचालन गोविन्द शर्मा का रहा और अंत में आभार अतुल जैन सुराणा द्वार व्यक्त किया गया।

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